सोमवार, 30 अक्टूबर 2017

ऐ दारी...जोगी के बारी, कइके करत हे अब्बड़ झन दावेदारी, जकांछ में भी गरमाई सियासत, चुनाव के लिए दावेदारों की लंबी फौज

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा. ‘ऐ दारी...जोगी के बारी’ वाला जुमला बहुत कम समय में पूरे जिले में पापुलर हो गया है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जोगी समर्थक कमर कसकर मैदान में उतर चुके हैं, जिससे जिले की सियासत और गरमा गई है। वहीं इस जुमले ने पार्टी के दावेदारों की फौज भी बढ़ा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की नवगठित पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) से मौजूदा समय में दावेदारों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त है। वैसे तो इस पार्टी में फिलहाल खुलकर गुटबाजी नहीं दिख रही है, लेकिन अधिकांश दावेदार खुद को बेहतर साबित करने अंदर ही अंदर रस्सा-कस्सी जरूर कर रहे हैं। कुछ दावेदारों ने तो शहर से लेकर गांव-गांव में पहुंचकर अपना जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की राजनीति कभी कद्दावर नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से शुरू होती थी, लेकिन उनके पार्टी से किनारा होते ही प्रदेश की राजनीतिक फिजा पूरी तरह बदल चुकी है। कांग्रेस का दामन छोडक़र पूर्व मुख्यमंत्री जोगी ने अपनी अलग पार्टी बना ली है, यही पार्टी आने वाले चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के गले की फांस बनने जा रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री जोगी की पार्टी ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सुप्रीमो जोगी ने कुछ दिनों पहले प्रदेश के 11 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी कर दी है। इनमें चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है। हालांकि, जिले के शेष पांच सीटों का फैसला जोगी ने अब तक सुरक्षित रखा है, इस वजह से उनकी पार्टी से चुनाव लडऩे वालों की धडक़नें भी तेज हो गई है। 

पार्टी सूत्रों के अनुसार, जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र के लिए अब तक जो नाम उभरकर सामने आए हैं, उसमें सबसे पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री जोगी के कट्टर समर्थकों में शामिल एवं उनके मुख्यमंत्रित्व के कार्यकाल में छग परिवहन प्राधिकार समिति के सदस्य रहे मो. इब्राहिम मेमन का है। मो. इब्राहिम उन लोगों से हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थतियों में भी पूर्व मुख्यमंत्री जोगी का साथ नहीं छोड़ा। वहीं इनके साथ युवाओं और ग्रामीणों की लंबी-चौड़ी फौज भी है, जो इनके हर सुख-दुख में खड़ी होती है। ठीक उसी तरह मो. इब्राहिम भी उनके परिवार का हिस्सा बन चुके हैं। मसलन, मो. इब्राहिम उनके साथ हमेशा खड़े रहते हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो कांग्रेस में रहकर विभिन्न पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके मो. इब्राहिम पिछले दो-तीन चुनावों में कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें तवज्जों नहीं दी। अब जब उनके राजनीतिक गुरू ने स्वयं की पार्टी बना ली है तो इस विधानसभा क्षेत्र से उन्हें टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। 

इसी क्रम में दूसरा नाम लंबे समय तक कांग्रेस के प्रदेश सचिव रहे तथा वर्तमान में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के गौसेवा प्रकोष्ठ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष की जवाबदारी निभा रहे गिरधारी यादव का है। यहां बता दें कि गिरधारी यादव उन लोगों में से एक हैं, जिन्होंने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के गठन के दौरान मरवाही क्षेत्र के ग्राम कोटमी में कई दिनों तक मौजूद रहकर पूर्व मुख्यमंत्री जोगी के प्रति अपनी निष्ठा पेश की है। चूंकि जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है। यहां की अधिकांश आबादी इसी वर्ग से है, जिनमें राठौर, साहू, देवांगन, यादव, कश्यप सहित अन्य जाति के मतदाता शामिल हैं। ऐसे में यदि जातिगत फैक्टर को ध्यान में रखते हुए टिकट वितरण किया जाता है तो गिरधारी यादव को टिकट मिलने की प्रबल संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इनके अलावा अन्य दावेदारों में युवा नेता टिंकू मेमन, गिल्लू शर्मा, शंकर सिंघानिया, जवाहर राठौर तथा महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष वर्षा सिंह का नाम शामिल है। इन दावेदारों में टिंकू मेमन भी काफी सशक्त हैं, क्योंकि वे पूर्व में कांग्रेस से भारी मतों से लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। टिंकू फिलहाल जोगी कांग्रेस में किसी अहम पद पर नहीं हैं, लेकिन यदि टिकट को लेकर युवा वर्ग की बात होगी तो टिंकू को चुनाव लडऩे का अवसर मिलना संभावित है। इनके अलावा पार्टी में महिला आरक्षण को ध्यान में रखते हुए वर्षा सिंह को रिजर्व में रखा गया है, ताकि यदि विरोधी दलों ने महिलाओं को अवसर दिया तो जोगी कांग्रेस इसके जवाब में महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष वर्षा सिंह को चुनावी मैदान में उतार सके। बहरहाल, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संभावित दावेदारों ने अपने स्तर पर चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है। कोई सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को फोकस कर रहा है तो कोई गांव-गांव और गली-गली में घूमकर जनसंपर्क कर रहा है। कुल मिलाकर जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र में जोगी समर्थकों की सक्रियता से राजनीति दिनों-दिन रोचक होती जा रही है।
 

आमजनता के बीच लोकलुभावन वायदे

भारतीय जनता पार्टी ने पिछले चुनाव में चावल, मुफ्त नमक, मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा जैसी योजनाओं को जनता के बीच ले जाकर सबका दिल जीता था और तीसरी बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, उसी तर्ज पर अब जोगी कांग्रेस भी चल रही है। पार्टी सुप्रीमो अजीत जोगी, उनके पुत्र अमित जोगी तथा बहु ऋचा जोगी जहां भी जनसंपर्क करने पहुंच रहे हैं, वहां लोकलुभावन वायदे किए जा रहे हैं। ये सभी दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में अगली बार जोगी सरकार बनने पर न केवल किसानों की पूरी उपज खरीदी जाएगी, बल्कि उन्हें समर्थन मूल्य के तहत अच्छी राशि भी दी जाएगी। इसके अलावा हर थाने के सामने चांदी की सडक़, किसानों की कर्ज माफी, गांव-गांव में बिजली, पानी की समुचित व्यवस्था एवं बेरोजगारों को सरकारी तथा प्रदेश के प्राइवेट संस्थानों में नौकरी दिलाने जैसे वायदे लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
 

भाजपा-कांग्रेस को हो सकता है नुकसान

जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी हैं। वे आईपीएस, आईएएस जैसे विभिन्न सेवाओं में रहने के साथ ही कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता, सांसद, राज्यसभा सदस्य, मुख्यमंत्री जैसे बड़े पदों की जवाबदारी संभाल चुके हैं। मसलन, उन्हें न केवल प्रशासनिक अनुभव है, बल्कि राजनीति के क्षेत्र में वे कद्दावर नेता के रूप में पूरे भारत में जाने जाते हैं। कुशाग्र बुद्धि की वजह से जोगी अपनी पार्टी में ऐसे-ऐसे लोगों को शामिल कर रहे हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखते हैं। इससे विरोधी दल, खासकर भाजपा-कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की धडक़ने तेज हो गई है। राजनीति के जानकारों की मानें तो आगामी चुनाव में जोगी कांग्रेस से न केवल कांग्रेस को नुकसान होगा, बल्कि भाजपा के परंपरागत वोट भी प्रभावित हो सकते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो जोगी फैक्टर को असर कहीं न कहीं आगामी चुनाव में जरूर देखने को मिलेगा।

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