जांजगीर-चांपा. राष्ट्रीय कैडेट कोर नई दिल्ली में अपने मुख्यालय के साथ भारतीय सैन्य कैडेट कोर है। यह स्वैच्छिक आधार पर स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए खुला है। राष्ट्रीय कैडेट कोर अनुशासित और देशभक्त नागरिकों में देश के युवाओं को संवारने में लगे हुए सेना, नौसेना और वायु सेना में एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है। भारत में राष्ट्रीय कैडेट कोर उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों और पूरे भारत में विश्वविद्यालयों से कैडेटों रंगरूटों का एक स्वैच्छिक संगठन है।
ये बातें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 जांजगीर के एनसीसी ऑफिसर दिनेश चतुर्वेदी ने बुधवार को केन्द्रीय विद्यालय जांजगीर में आयोजित एनसीसी के एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला में स्काउट-गाइड के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कैडेटों को छोटे हथियारों और परेड में बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। राष्ट्रीय कैडेट कोर अनुशासित और देशभक्त नागरिकों में देश के युवाओं को संवारने में लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में राष्ट्रीय कैडेट कोर उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों और पूरे भारत में विश्वविद्यालयों से कैडेटों रंगरूटों का एक स्वैच्छिक संगठन है। एनसीसी सबसे पहले जर्मनी में 1666 में शुरू किया गया। भारत में एनसीसी 1948 की राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम के साथ बनाई गई। एनसीसी की उत्पत्ति सेना की कमी को दूर करने के लिए भारतीय रक्षा अधिनियम 1917 के तहत हुई थी। इसके बाद वर्ष 1920 में भारतीय प्रादेशिक अधिनियम पारित किया गया। उसी दौरान विश्वविद्यालय कोर विश्वविद्यालय प्रशिक्षण कोर (यूटीसी) द्वारा बदल दिया गया।
चूंकि उद्देश्य यूटीसी की स्थिति को बढ़ाने और युवाओं के लिए इसे और आकर्षक बनाने के लिए था। इसलिए यूटीसी अधिकारियों और कैडेटों को सेना की तरह कपड़े पहनना पड़ा था, जो सशस्त्र बलों के भारतीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। राष्ट्रीय कैडेट कोर 1942 में ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित किया गया था, जो विश्वविद्यालय अधिकारी प्रशिक्षण कोर के एक उत्तराधिकारी के रूप में माना जा सकता है। यह यूओटीसी के रूप में नामकरण किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूओटीसी ब्रिटिश द्वारा निर्धारित उम्मीदों पर कभी नहीं आया था। यह एक बेहतर तरीके से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर सकता है। पंडित हेमवती कुंजरू की अध्यक्षता वाली समिति ने एक राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों और कॉलेजों में स्थापित करने के लिए एक कैडेट संगठन की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम गवर्नर जनरल ने स्वीकार कर लिया और 15 जुलाई 1948 को नेशनल कैडेट कोर अस्तित्व में आया। 1948 में डिवीजन स्कूल और कॉलेज जा रही लड़कियों को समान अवसर देने के लिए कदम उठाया गया। 1952 मे एयर विंग जोड़ा गया। इससे पहले 1950 में एक अंतर सेवा छवि दिया गया था। उसी वर्ष एनसीसी पाठ्यक्रम ने एनसीसी के विकास में गहरी रुचि ली, जो स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू के कहने पर एनसीसी पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में सामुदायिक विकास, सामाजिक सेवा गतिविधियों में शामिल करने के लिए बढ़ाया गया था। राष्ट्र की आवश्यकता को पूरा करने के लिए 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद एनसीसी प्रशिक्षण 1963 में अनिवार्य किया गया था। 1968 में कोर फिर स्वैच्छिक बनाया गया था। एनसीसी ऑफिसर चतुर्वेदी ने बताया कि 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध और 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान एनसीसी कैडेट सुरक्षा की दूसरी पंक्ति थे। सामने से हथियार और गोला बारूद की आपूर्ति, आयुध कारखानों की सहायता के लिए वे शिविर का आयोजन करते थे। साथ ही दुश्मन पैराटूपर्स कब्जा करने के लिए गश्ती दल के रूप में इस्तेमाल किए जाते थे। इस दौरान एनसीसी ऑफिसर चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों के कई प्रश्नों का सटीक जवाब दिया, जिससे विद्यार्थी संतुष्ट नजर आए।
उद्बोधन के क्रम में विद्यालय की प्राचार्य संगीता लूथर ने कहा कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सर्वांगिण विकास करना है। उन्होंने विद्यालय में संचालित स्काउट-गाइड के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि स्काउट के कर्तव्य कई प्रकार के होते हैं। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों का वे प्राथमिक उपचार करते हैं। वे रोगियों की देखभाल करते हैं। वे हिंसा और दंगों में लोगों का बचाव करते हैं। यदि उन्हें सडक़ के किनार कोई लाचार व्यक्ति दिख जाए तो वे उसे उसके घर अथवा अस्पताल पहुंचाते हैं। प्राचार्य ने स्कूल की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
इसी क्रम में पालक-शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष राजेन्द्र राठौर ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को अपना संपूर्ण ध्यान अध्ययन कार्य में लगाना चाहिए। वे एनसीसी, स्काउट-गाइड और एनएसएस से जुडक़र स्वयं तथा समाज की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि विद्यार्थियों का एक अच्छा मित्र शिक्षक होता है, इसलिए शिक्षक को अपनी सारी समस्याओं से अवगत कराएं। यदि कोई दुव्र्यवहार करता है अथवा छींटाकशी करता है तो उसकी जानकारी अपने अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों को भी दें, ताकि समय रहते उस समस्या का समाधान निकाला जा सके। मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल केवल नई जानकारियों के लिए करें, इसके दुरूपयोग के परिणाम घातक हो सकते हैं। कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार लखनलाल चंद्रा ने भी संबोधित किया। इसके बाद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 जांजगीर के एनसीसी कैडेट्स ने विद्यालय परिसर में ड्रील कर केवि के विद्यार्थियों को परेड की बारीकियों से अवगत करवाया। कार्यक्रम का संचालन भारतीय स्काउट-गाइड का उन्नत कोर्स कर चुके केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षक टीआर चौहान तथा बुनियादी कोर्स कर चुके शिक्षक एमके कौशिक ने किया। इस अवसर पर शिक्षक-शिक्षका सहित विद्यालय के स्काउट-गाइड के बच्चे मौजूद थे।



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