गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

केन्द्रीय विद्यालय की छबि खराब करने रची जा रही साजिश- संगीता लूथर

प्राचार्य ने प्रेस कान्फ्रेंस कर दी जानकारी, प्राइवेट स्कूलों के संचालकों पर षडय़ंत्र रचने का आरोप

 

जांजगीर-चांपा. न्यूनतम शुल्क पर छात्रों को अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा जिला मुख्यालय जांजगीर में संचालित की जा रही केन्द्रीय विद्यालय की छबि खराब करने की साजिश कुछ प्राइवेट स्कूल के संचालकों द्वारा की जा रही है। संबंधित प्राइवेट स्कूल के संचालकों ने अपने संस्थान को बेहतर साबित करने के लिए कुछ अखबारों का सहारा लिया है, जिनमें भ्रामक और तथ्यहीन खबर प्रकाशित करवा कर केवी के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। संपूर्ण तथ्यों के साथ इसकी जानकारी कलेक्टर तथा केन्द्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली को भेजी जा रही है। साथ ही उनसे आग्रह किया जा रहा है कि ऐसे समाचार पत्रों के खिलाफ तत्काल उचित कार्यवाही करें, ताकि केवी की छबि खराब न हो और पालक गुमराह होने से बच जाएं।

जानकारी देती केवी की प्राचार्य
ये बातें केन्द्रीय विद्यालय जांजगीर की प्रभारी प्राचार्य संगीता लूथर ने गुरूवार को विद्यालय में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय जांजगीर में चार वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर ओपी चौधरी एवं अन्य प्रशासनिक अफसरों की पहल पर केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना हुई थी। शुरूआती दौर में सुविधा-संसाधन का अभाव था, लेकिन वर्तमान में विद्यालय में सभी तरह की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस विद्यालय में आठवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जिसमें पढऩे वाले बच्चों को शासन से निर्धारित मापदंड के अनुरूप अनुभवी शिक्षकों द्वारा शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय में अध्ययनरत् विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ ही खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, योगा क्लॉसेस, म्युजिक क्लॉस सहित उन तमाम गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जो प्राइवेट विद्यालयों में कभी नहीं होता। 

प्राचार्य ने बताया कि इस वर्ष विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत् प्रतिशत रहा है। सभी बच्चों ने उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर विद्यालय, नगर सहित पूरे प्रदेश का नाम रौशन किया है। खेलकूद और अन्य गतिविधियों में भी विद्यालय को इस वर्ष कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वहीं वर्तमान शैक्षणिक सत्र में नियमित शिक्षकों के अलावा पर्याप्त संविदा शिक्षक बच्चों को अध्यापन करवा रहे हैं। केवी जांजगीर की लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ रही है और लोग अपने बच्चों को इस विद्यालय में प्रवेश दिलाने हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। प्रत्येक कक्षाओं में निर्धारित सीट से आठ से दस गुना अधिक प्रवेश आवेदन पत्र इस वर्ष प्राप्त हुए हैं, जो जिले में संचालित कुछ प्राइवेट स्कूल के संचालकों को रास नहीं आ रहा है। इस वजह से वे कुछ समाचार पत्रों का सहारा लेकर केवी की छबि खराब करने पर तूले हुए हैं। 

प्राचार्य लूथर ने कहा कि केवी का नया भवन मुनुंद मार्ग में तैयार हो रहा है, जो सर्वसुविधायुक्त है। आगामी दिनों में वहां स्कूल संचालित होगा। बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्कूल परिसर को सीसी कैमरे से लैस किया गया है। साथ ही सिक्योरिटी गार्ड और चौकीदारों की नियुक्ति की गई है, ताकि बच्चे पूरे समय तक निगरानी में रहे। उन्होंने कहा कि जिन समाचार पत्रों में केवी के खिलाफ भ्रमक खबर प्रकाशित की गई है, उसकी जानकारी कलेक्टर एवं केन्द्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली को तथ्यों के साथ भेजी जा रही है। साथ ही उच्चाधिकारियों से आग्रह किया जा रहा है कि केवी के खिलाफ साजिश रचने वाले ऐसे समाचार पत्र समूहों तथा प्राइवेट स्कूल संचालकों के विरूद्ध कार्यवाही करें, ताकि अभिभावक गुमराह न हो।

पहला स्कूल जहां मेडिकल सुविधा

प्राचार्य लूथर ने बताया कि केन्द्रीय विद्यालय जिला मुख्यालय जांजगीर का पहला ऐसा स्कूल है, जहां संपूर्ण मेडिकल सुविधा उपलब्ध है। आपातकाल में बच्चों को त्वरित चिकित्सा मुहैया कराने के लिए इस विद्यालय में चिकित्सक तथा नर्स की व्यवस्था की गई है। स्कूल के एक कक्ष को मिनी हॉस्पिटल का स्वरूप दिया गया है,  जहां आवश्यक दवाएं एवं चिकित्सा संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसी सुविधा शहर के प्राइवेट स्कूलों में नहीं है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली द्वारा सरकार के अधीन संचालित देश भर के किसी भी केन्द्रीय विद्यालय में स्कूल बस की सुविधा नहीं दी गई है। सरकार के अधीन जहां-जहां विद्यालय संचालित हंै, वहां अभिभावकों द्वारा प्राइवेट वाहन की व्यवस्था कर विद्यार्थियों को घर से स्कूल तक लाने ले जाने की व्यवस्था बनाई गई है।

ट्रांसफर हुआ तो टीसी कटेगी ही

एक सवाल के जवाब में प्राचार्य ने कहा कि केवी में पढऩे वाले अधिकांश बच्चे सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के होते हैं। उनकी सुविधा को ध्यान में रखकर ही देश भर में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना की गई है, ताकि ट्रांसफर होने पर उनके बच्चों का पाठ्यक्रम न बदले और जहां भी जाएं वहां के केन्द्रीय विद्यालय में बच्चों को आसानी से प्रवेश दिलवा सके। इस वर्ष विद्यालय में अध्ययनरत कुछ अभिभावकों ने बच्चों की टीसी निकलवाई है। जिन्होंने टीसी निकलवाई है, उनमें से अधिकांश अभिभावक शासकीय सेवक हैं, जिनका ट्रांसफर अन्यत्र हुआ है। इसके बावजूद कुछ समाचार पत्रों में भ्रामक खबर प्रकाशित की गई है।

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