कार्रवाई के दौरान मौके पर रही तनाव की स्थिति, भारी संख्या में बल तैनात
जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय जांजगीर के केरा रोड में शासकीय भूमि पर निर्मित सांई मंदिर को आखिरकार प्रशासन ने बुधवार की देर रात ढहवा दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर तनाव की स्थिति निर्मित हुई, जिससे निपटने के लिए प्रशासनिक अफसरों ने पहले से ही भारी संख्या में बल मंगवा लिया था।
जिला मुख्यालय जांजगीर के केरा रोड में नए बस स्टैण्ड के समीप शासकीय भूमि अवस्थित है, जिस पर आसपास के कुछ लोगों ने जनसहयोग से सांई मंदिर का निर्माण करवाया था, जिस पर मोहल्ले के ही कुछ लोगों को आपत्ति थी। संबंधितों ने मामले की शिकायत जांजगीर तहसीलदार, एसडीएम तथा कलेक्टर से की थी। शिकायत की जांच के लिए तत्कालीन कलेक्टर ने एसडीएम तथा तहसीलदार को नियुक्त किया था, जिसकी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने टीम गठित कर मंदिर ढहाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्रवाई के दौरान वहां निर्मित हुई तनाव की स्थिति को ध्यान में रखकर प्रशासन की टीम को वहां से बैरंग लौटना पड़ गया था। इससे शिकायतकर्ताओं में आक्रोश था और उन्होंने कई बार कलेक्टर से शिकायत की, लेकिन बात नहीं बनी, तब मामले को कमिश्नर तक पहुंचाया गया, लेकिन वहां से भी मंदिर ढहाने को लेकर कोई खास रूचि नहीं दिखाई गई।
ऐसे में शिकायतकर्ता ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर का सहारा लिया। वहां याचिका दायर कर मंदिर ढहाने की गुजारिश की गई। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ दिनों पहले कलेक्टर सहित अन्य अफसरों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब भी मांगा था। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद सांई मंदिर को ढहाने का आदेश पारित किया था। हाईकोर्ट के आदेश पर एसडीएम अजय उरांव, तहसीलदार शशिकुमार चौधरी, एएसपी पंकज चंद्रा सहित अन्य प्रशासनिक अफसरों की टीम ने बुधवार की देर रात तीन बुलडोजर लेकर केरा रोड पहुंची और मंदिर को ढहाने की कार्यवाही शुरू की।
प्रशासनिक टीम के मौके पर पहुंचने की खबर से आसपास के लोग इकट्ठे हो गए और मंदिर को ढहाने से रोकने का प्रयास करने लगे। आसपास के लोगों ने प्रशासनिक टीम द्वारा की जा रही कार्यवाही का जमकर विरोध किया। आलम यह था कि मौके पर तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने मौके पर उपस्थित प्रशासनिक अफसरों ने पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल बुलवा लिया था। इसके बावजूद मंदिर से जुड़े लोग विरोध प्रकट करते रहे, लेकिन उनकी एक न चली और बुलडोजर ने मंदिर को ढहा दिया।
वर्षों से चल रहा था विवाद
सांई मंदिर निर्माण के समय से शुरू हुआ विवाद कई वर्षों से जारी था। इस मामले से जुड़े दोनों पक्ष आए दिन शिकवा-शिकायत लेकर प्रशासनिक अफसरों के पास पहुंच रहे थे। प्रशासनिक अफसरों की टीम जहां कार्यवाही के लिए मौके पर पहुंचती तो दूसरे पक्ष के लोग हंगामा शुरू कर देते थे। स्थानीय स्तर पर बात नहीं बनने से शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट के जज ने कलेक्टर सहित कई अफसरों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट के दखल के कारण जिला प्रशासन को आखिरकार मंदिर को ढहवाना ही पड़ गया।



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