बुधवार, 5 अप्रैल 2017

डीजे के बंगले के सामने बजा डीजे, बारातियों ने लगाए ठुमके

जिला मुख्यालय में एक बार फिर ध्वनि प्रदूषण अधिनियम का उल्लंघन


जांजगीर-चांपा. सरकार ने ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए भले ही नियम-कायदे बनाए हैं और उच्चतम न्यायालय ने उन नियम-कायदों का कड़ाई से पालन करने का शासन-प्रशासन को फरमान जारी किया है, लेकिन नियम-कायदों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जाती है, यह बुधवार को जिला मुख्यालय जांजगीर में देखने को मिला। इस रात जिला एवं सत्र न्यायाधीश के बंगले के सामने न केवल तेज आवाज में डीजे बजा, बल्कि बारात में शामिल लोगों ने बंगले के सामने ही तेज आवाज में बज रहे डीजे की धुन पर ठुमके भी लगाए।

बढ़ते ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके मुताबिक जिम्मेदार अधिकारियों की अनुमति के बगैर तेज आवाज वाले ध्वनि विस्तार यंत्रों का उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन जिला मुख्यालय जांजगीर में नियम-कायदों की आए दिन धज्जियां उड़ रही है। बुधवार की रात भी कुछ इसी तरह की स्थिति निर्मित हुई। दरअसल, इस दिन शहर में कई शादियां हुई। शादी के बारात के लिए लोगों ने डीजे बजवाया। इन्हीं शादियों में से एक बारात कचहरी चौक से होते हुए विवेकानंद मार्ग पर निकली। बारात में डीजे लगवाया गया था, जिसकी आवाज काफी तेज थी। 

डीजे की धुन पर बारातियों ने जमकर ठुमके लगाए। हद तो तब हो गई, जब डीजे की आवाज विवेकानंद मार्ग पर स्थित जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव के बंगले के सामने भी कम नहीं हुई। बारातियों ने उनके बंगले के सामने डीजे को रूकवाकर कई फिल्मी गीतों पर जोरदार ठुमके लगाए। ज्ञात हो कि विवेकानंद मार्ग पर पुलिस कंट्रोल रूम सहित जिला एवं सत्र न्यायाधीश का बंगला है। इसके अलावा इसी मार्ग में कई शासकीय आवास हैं, जहां विभिन्न श्रेणियों के न्यायाधीश तथा सरकारी मुलाजिम निवास करते हैं। इसके बावजूद, प्रशासन और पुलिस की सुस्ती कई सवाल खड़ी कर रही है।

रद्दी की टोकरी में फरमान

जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव ने कुछ माह पहले कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन तथा पुलिस अधीक्षक अजय यादव को पत्र भेजकर उनसे ध्वनि विस्तारक अधिनियम के तहत की गई कार्यवाही तथा इसकी रोकथाम के लिए उठाए गए आवश्यक कदम की विस्तृत जानकारी मांगी थी। डीजे ने पत्र के माध्यम से ध्वनि विस्तार यंत्र से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक सेल गठित करने तथा ऐसे मामलों में संबंधितों के विरूद्ध त्वरित कार्रवाई करने कहा था। मजे की बात है कि प्रशासनिक अफसरों ने जिला न्यायाधीश के इस पत्र को पढ़ा तो जरूर, लेकिन उसमें उल्लेखित बातों पर न तो अमल किया और न ही इस संबंध में अपने मातहतों को उन्होंने कोई खास दिशा-निर्देश दिए।

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