विधानसभा में क्षेत्रीय विधायक के सवाल पर कृषि मंत्री ने किया खुलासा
चांपा. जिस ध्येय के साथ चांपा में हसदेव लोक महोत्सव प्रारंभ किया गया है, उसे राज्य सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। भले ही इस बात की जानकारी अधिकांश लोगों को नहीं होगी, लेकिन आपकों बता दें कि नगर की एकबार फिर से उपेक्षा हुई है। जिस तरह की जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक आगे भी यहां हसदेव लोक महोत्सव का आयोजन चंदे से ही होता रहेगा। क्योंकि सरकार इस महोत्सव को सरकारी मान्यता देने के मूड में नहीं है। इसका खुलासा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान स्थानीय विधायक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कृषि मंत्री द्वारा दिए गए जवाब से हुआ है।
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| File Photo Hasdeo Lok Mahotsava |
भले ही राजपत्र में जांजगीर और चांपा को मिलाकर जिला बनाए जाने का उल्लेख हो, लेकिन धरातल पर चांपा नाममात्र का जिला है। यहां चांपा जंक्शन के साथ ही हसदेव नदी क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी बनी हुई है। वहीं कोसा, कांसा व कंचन की ख्याति विदेशों तक फैली हुई है। नगरीय क्षेत्र में औद्योगिक संस्थानों की भरमार है। हसदेव से निकली रेत से सरकार को करोड़ों का राजस्व मिलता है, वहीं क्रशर व पत्थर खदानों से सरकार मालामाल हो रही है। इसके बावजूद चांपा की हमेशा से उपेक्षा हो रही है। यही वजह है कि अधिकांश जिला स्तरीय सरकारी विभाग जांजगीर में ही स्थापित है। यहां तक बिजली विभाग का अधीक्षण यंत्री कार्यालय चांपा में खोले जाने की स्वीकृति मिली थी, लेकिन यह कार्यालय जांजगीर में कैसे खुल गया इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
आपकों बता दें कि चांपा में सरकारी विभाग नहीं खोले जाने के पीछे स्थानाभाव को कारण बताया जाता है, जबकि चांपा का ही दो पुराना नगरपालिका भवन वाहन स्टैंड सहित कई तरह का काम आ रहा है। इसके अलावा रामबांधा तालाब के पास भी भूमि है। क्योंकि नियम विरूद्ध पहले ही यहां पीएचई, नगरपालिका व एक अन्य भवन बनाया गया है तो अन्य सरकारी भवन क्यों नहीं बनाया जा सकता। नगरपालिका में कांग्रेस की सत्ता आते ही नपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने यहां हसदेव लोक महोत्सव प्रारंभ कराया। इसके पीछे अग्रवाल की मंशा थी कि स्थानीय कलाकारों को एक मंच मिल जाए, वहीं औद्योगिक मेले के जरिए आम लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी मिले, जिसका उपयोग भविष्य निर्माण में किया जा सके।
बहुत कम लोगों को पता होगा कि भले ही यह कार्यक्रम प्रशासन की देखरेख में होता है, लेकिन इसे सरकारी मान्यता नहीं मिली है। हसदेव महोत्सव को सरकारी मान्यता मिलने के बाद इस महोत्सव के लिए सरकार अलग से बजट निर्धारित करेगी। जिस तरह जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव के लिए बजट आवंटित किया जाता है। क्षेत्रीय विधायक मोतीलाल देवांगन ने सदन में हसदेव महोत्सव को सरकारी मान्यता दिए जाने का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रस्ताव आने पर विचार किया जाएगा। इससे जाहिर है कि हसदेव महोत्सव को सरकारी दर्जा मिलने की राह काफी कठिन है और यहां चंदे की राशि से ही इसी तरह महोत्सव होता रहेगा।
अपने हक के लिए कब आएंगे आगे!
चांपा की उपेक्षा के लिए कहीं न कहीं नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है। जिस उम्मीद और विश्वास से हम नेता चुनते हैं यदि वो उसमें खरा न उतरे तो उसे क्या कहा जाए। जनहित के अधिकांश मुद्दों में यहां के नेता बहुत विलंब में आवाज उठाते हैं। वहीं जिन मुद्दों पर नेताओं ने आम लोगों के साथ मिलकर सडक़ की लड़ाई लड़ी है, उसमें सफलता अवश्य मिली है। चांपा में बन रहे ओवरब्रिज का जब काम बंद हो गया था, तब सभी दल के नेताओं सहित आम लोगों ने आवाज उठाई थी, जिसके कारण काम प्रारंभ हो सका था। इसी तरह जिला बनने के बाद से उपेक्षित चांपा के लिए आवाज उठाई जाती तो यह नगर वाकई जिला के अनुरूप ही होता। बहरहाल, अब देखना यह है कि हसदेव लोक महोत्सव को सरकारी मान्यता दिलाने के लिए यहां के नेता अपनी आवाज बुलंद करते भी है या नहीं।

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