ग्राम धनेली में आबकारी विभाग की टीम ने छह दिन पहले मारा था छापा
जांजगीर-चांपा. राज्य सरकार ने शराब की अवैध बिक्री करने वाले कोचियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी पुलिस और आबकारी अमले को दी है, लेकिन आबकारी अमला छापा मारने के बाद शराब तस्करों से सौदेबाजी कर रहा है। छापामार अभियान के दौरान जिनसे मोटी रकम प्राप्त हो रही है, उसे छोड़ दिया जा रहा है। वहीं जो रकम देने आनाकानी कर रहे हैं, उनके खिलाफ केस बनाया जा रहा है। ताजा मामला ग्राम धनेली का है, जहां बीते पांच अप्रैल को सहायक जिला आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में आबकारी विभाग की एक टीम ने छापा मारा था, जहां से नौ पेटी अवैध शराब बरामद हुई, लेकिन तस्कर को छोड़ दिया गया। आरोप है कि सहायक जिला आबकारी अधिकारी ने केस रफा-दफा करने के एवज में तस्कर से डेढ़ लाख रुपए लिया है, जिसके कारण उसके खिलाफ केस नहीं बनाया गया है।
उल्लेखनीय है कि नए वित्तीय वर्ष से शराब दुकानों का संचालन सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस वजह से शासन स्तर से शराब की अवैध बिक्री करने वालों की धरपकड़ करने का फरमान जारी हुआ है, लेकिन जिले में अवैध शराब पकडऩे को लेकर आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा दोहरी नीति अपनाई जा रही है। आबकारी अमला कार्रवाई के दौरान तस्करों से केस बनाने तथा छोडऩे को लेकर खुलेआम सौदेबाजी कर रहा है। ऐसा ही एक मामला बीते पांच अप्रैल को पामगढ़ थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत धनेली में सामने आया है। ‘दैनिक नवीन कदम’ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते पांच अप्रैल को ग्राम धनेली में एक ग्रामीण द्वारा बड़े पैमाने पर शराब का अवैध भंडारण किए जाने की सूचना पर आबकारी विभाग की टीम सहायक जिला आबकारी अधिकारी पीएल नायक की अगुवाई में गांव पहुंची। आबकारी विभाग की टीम ने संदेही सुखनंदन राठौर उर्फ गुड्डू पिता समेलाल राठौर के मकान में छापा मारा था। बताया जा रहा है कि वहां से सात पेटी देसी शराब तथा दो पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई। आबकारी अमले को नियमत: तस्कर के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मुकदमा कायम करना था, लेकिन सहायक जिला आबकारी अधिकारी नायक एवं उनके टीम के सहयोगियों ने सीधे सौदेबाजी शुरू कर दी। यह खेल करीब एक से डेढ़ घंटे तक चला। जैसे ही डेढ़ लाख रुपए में सौदा तय हुआ, वैसे ही टीम वहां से रकम लेकर निकल गई। इसकी भनक कुछ लोगों को लगी तो उन्होंने आबकारी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, तब उन्हें जानकारी दी गई कि ग्रामीण सुखनंदन राठौर के मकान में छापा तो मारा गया था, लेकिन वहां से शराब जब्त नहीं हुई थी। जबकि कुछ ग्रामीणों ने सुखनंदन राठौर के घर से शराब जब्त होते देखा है। ग्रामीणों का दावा है कि उनके घर से 11 पेटी शराब बरामद हुई है, लेकिन आबकारी अमले ने मोटी रकम लेकर मामले को रफा-दफा किया है। ऐसे में आबकारी विभाग के अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।
एक से डेढ़ लाख हुआ तो माने एडीईओ
बताया जा रहा है कि आबकारी विभाग की टीम ने जब सुखनंदन राठौर के घर छापा मारा तो उसके विरूद्ध केस बनाने के बजाय सीधे सौदेबाजी शुरू कर दी गई। सुखनंदन ने केस नहीं बनाने के लिए एडीईओ तथा उनकी टीम के दबाव में आकर एक लाख रुपए देने की बात कही, लेकिन अधिकारी राजी नहीं हुए। वह काफी देर तक टीम के आगे मिन्नतें करता रहा, मगर बात नहीं बनी। इसके बाद बोली बढ़ती गई और आखिरकार डेढ़ लाख रुपए में सौदा तय हुआ। अधिकारी ने सुखनंदन से सौदे की रकम ली और मामले को वही के वही रफा-दफा कर दिया।
ऐसे खुली अफसर के करतूत की पोल
ग्राम धनेली निवासी सुखनंदन राठौर के घर जब छापा पड़ा तो गांव भर में हल्ला मच गया। लोगों को लग रहा था कि पामगढ़ पुलिस ने उसके घर छापा मारकर शराब बरामद किया है, लेकिन कार्रवाई के बाद सुखनंदन के घर से टीम खाली हाथ लौटी। वहीं कुछ देर बाद सुखनंदन गांव में घूमता हुआ नजर आया तो ग्रामीणों को संदेह हुआ। ग्रामीण यह समझ रहे थे कि पामगढ़ पुलिस ने लेनदेन कर मामले को रफा-दफा किया है। जब यह बात मीडिया तक पहुंची और पामगढ़ थाना प्रभारी विवेक पाटले से जानकारी ली गई तो उन्होंने ग्राम धनेली में छापा मारे जाने की बात से साफ इंकार किया। पाटले का कहना था कि संभवत: यह कार्रवाई आबकारी विभाग की टीम ने की होगी। ऐसे में आबकारी विभाग के छोटे कर्मचारियों से जानकारी ली गई तो सारा मामला खुलकर सामने आया। एक-दो कर्मचारियों ने बताया कि एडीईओ ने डेढ़ लाख रुपए लेकर केस नहीं बनाया है।
एसी कह रहे मामले की जांच कराएंगे
इस मामले के तूल पकडऩे के बाद पूरा आबकारी अमला बैकफुट पर आ गया है। आबकारी विभाग के प्रभारी सहायक आयुक्त विकास गोस्वामी का कहना है कि इस मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। उनका यह भी कहना है कि शासन स्तर से प्राप्त निर्देश के कारण विभाग की टीम लगातार छापा तो मार रही है, लेकिन धनेली गांव में ऐसा कोई मामला हुआ है, इससे वे बेखबर हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि सहायक जिला आबकारी अधिकारी के खिलाफ लगा आरोप निहायत ही संगीन है। मामले की बारीकी से जांच कराएंगे। जांच में यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधितों के खिलाफ शासन स्तर से कार्यवाही कराई जाएगी।
आबकारी अमले ने की कार्रवाई
पामगढ़ पुलिस ने ग्राम धनेली में सप्ताह भर के भीतर कोई छापा नहीं मारा है। वहां आबकारी विभाग की टीम ने कार्रवाई की होगी। इसलिए इस संबंध में आबकारी अधिकारी ही पूरी जानकारी दे सकते हैं।

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