जांजगीर-चांपा. कोषालय को केन्द्रीयकृत करने के लिए नया साफ्टवेयर लांच किया गया। इस कारण कोषालय का पूरा काम गड़बड़ा गया है। साफ्टवेयर 10 अप्रेल को आया। इस कारण जिले के 10 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों की सेलरी नहीं बन पाई है। इस कारण उन्हें समस्या का सामना करना पड़ रह है।
ट्रेजरी के अधिकारी इस परेशानी को दूर होने में सप्ताहभर का समय और लगने की बात कर रहे हैं। इधर, तनख्वाह नहीं आने के कारण कर्मचारियों के कई काम अटक गए हैं। इनमें सबसे अधिक समस्या शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की है। क्योंकि उनकी संख्या वेतन रूकने वालों में अधिक है। अधिकारियों ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष के पहले महीने में वेतन थोड़ी देर से तो आता है, लेकिन इस बार देरी का कारण ट्रेजरी का केन्द्रीयकृत होना है। कोषालय विभाग के ई-कोष साफ्टवेयर को सेंट्रलाइज्ड करने की योजना पुरानी है। बावजूद, विभाग ने पहले से प्लानिंग नहीं की। अब केन्द्रीयकृत करने के लिए सभी सर्वर डाउन कर दिए हैं। इसीलिए कर्मियों की सैलरी से लेकर तमाम खर्चोंं के बिल पेंडिंग है। अगर विभाग फ्यूचर प्लानिंग करता तो यह दिक्कत नहीं होती।
विभागों का सर्वर डाउन
जिले के सभी शासकीय विभाग की ओर से कर्मियों का बिल ऑनलाइन तैयार है। इसमें स्टाफ अटेंडेंस से लेकर तमाम खर्चे शामिल हैं। जिस वेबसाइट में जाकर बिल बनाया जाता है, उसका सर्वर भी डाउन है। अक्सर शिक्षा विभाग की वेबसाइट में यही परेशानी रहती है। इसीलिए शिक्षाकर्मियों का वेतन समय पर जारी नहीं होता।
केन्द्रीयकृत होगा सिस्टम
राज्य शासन पेपरलैस वर्किंग पर फोकस कर रहा है। इसलिए हरेक जिले के कोषालय विभाग को केन्द्रीयकृत कर रहा है। यह काम मार्च से शुरू हो चुका है। बिल पास करने वाले सर्वर को फाइनेंस डिपार्टमेंट ने क्लोज कर दिया है। बजाय अब क्लाउड सर्वर लगा रहा है।
ईएमआई जमा करने वाले परेशान
जिले में ज्यादातर शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के सैलरी एकाउंट से हर महीने ईएमआई के लिए जमा होता है। होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन, कार लोन, एलआईसीए मेडिक्लेम की प्रीमियम है। महीने की एक तारीख से लेकर 10 तारीख तक ईएमआई एकाउंट से कट जाता है। अब ऐसी स्थिति में यदि एकाउंट में पर्याप्त राशि नहीं रही तो चेक बाउंस होने का खतरा भी बढ़ जाएगा।
भुगतान अटका तो काम भी प्रभावित
अधिकारियों ने बताया कि जिले के नौ ब्लाकों में सैकड़ों सरकारी दफ्तर चल रहे हैं, जिनका भुगतान ट्रेजरी से ही होता है। यानी इस समस्या का सीधा असर दफ्तरों पर भी पड़ा है। इसलिए हर दिन विभाग प्रमुख भी कोषालय से जानकारी लेने में लगे हैं, ताकि भुगतान को लेकर दिक्कतें न आए। बताया गया कि साफ्टवेयर आने के बाद से हेड टू हेड बदलने का काम किया जा रहा है। इसलिए एक शिफ्ट होने पर विभाग कर्मचारियों को वेतन भ तत्काल दिया जा रहा है।
अब रायपुर से होगी मॉनिटरिंग
कोषालय को पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा रहा है और उसकी मॉनिटरिंग रायपुर से की जाएगी। बताया गया कि कोषालय का काम पहले से ऑनलाइन था, लेकिन सर्वर यहीं होने के कारण मॉनिटरिंग की समस्या नहीं आती थी। अब नया साफ्टवेयर आने से हेड पूरी तरह से बदल गया है। इसलिए ट्रेजरी अधिकारियों का कहना है कि काम तेजी से किया जा रहा है। व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।

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