जांजगीर-चांपा. जिला प्रशासन एक तरफ जहां अभियान चलाकर शासकीय भूमि को अतिक्रमणमुक्त करने में जुटा हुआ है, वहीं विकासखंड मुख्यालय बलौदा से चंद किलोमीटर दूर स्थित ग्राम डोंगरी के निस्तारी नाले के ऊपर एक निजी स्कूल की इमारत खड़ी कर दी गई है। इस मामले की शिकायत कलेक्टर तथा राजस्व विभाग के अन्य अफसरों से कई बार हो चुकी है, लेकिन उनकी उदासीनता के चलते स्कूल संचालक के हौसले बुलंद हैं।
बलौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम डोंगरी में बाला जयंती मोमोरियल पब्लिक स्कूल संचालित है। यह स्कूल दो साल पहले तक गांव के ही एक टूटे-फूटे भवन में लगता था, जहां किसी तरह की सुविधाएं नहीं थी। बावजूद इसके स्कूल संचालक वहां पढऩे वाले विद्यार्थियों के अभिभावक से फीस बतौर मोटी रकम ऐंठ रहा था। इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढऩे लगी, तब स्कूल संचालक ने गांव के बाहर बलौदा-पंतोरा मुख्य मार्ग पर स्थित एक खेत के कुछ भाग पर स्कूल के लिए भवन का निर्माण शुरू करवा दिया, जिसके लिए ग्राम पंचायत से किसी तरह की अनुमति नहीं लगी गई। हद तो तब हो गई, जब संचालक ने उस खेत के किनारे से गुजरे नाले पर ही अवैध कब्जा करते हुए उसके ऊपर स्लेब डालकर स्कूल भवन का निर्माण करवा दिया। इसकी जानकारी होने पर गांव के सरपंच एवं अन्य लोगों ने मामले की शिकायत अधिकारियों से की, लेकिन अधिकारियों ने मौका मुआयना कर कार्यवाही करना मुनासिब नहीं समझा। इस वजह से स्कूल संचालक के हौसले और बुलंद हो गए और उसने किसी की परवाह किए बगैर नाले के ऊपर ही इमारत खड़ी करवा दी, जिसकी शिकायत भी कलेक्टर तक पहुंची, लेकिन कलेक्टर ने इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजतन, निजी स्कूल पिछले दो-तीन सालों से नाले के ऊपर खड़ी इमारत में संचालित हो रही है। नाले में हुए अतिक्रमण से आसपास के लोगों को निस्तारी की समस्या हो रही है। वहीं बरसात के दिनों में पानी का दबाव बढऩे से स्कूल भवन के ढहने की भी आशंका है।
छात्रवृत्ति घोटाले का मुख्य आरोपी है संचालक
शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए वैसे तो सरकार ने कई नियम-कायदे बना रखे हैं, जिसका हर हाल में पालन करना जरूरी है, लेकिन ग्राम डोंगरी में संचालित बाला जयंती मोमोरियल पब्लिक स्कूल के संचालक रामायण साहू ने नियम कायदों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। शिक्षाकर्मी वर्ग तीन के पद पर रहते हुए भी इन्होंने निजी स्कूल का पंजीयन करवाकर संचालन शुरू कर दिया। वहीं कम समय में मोटी रकम कमाने के लिए इन्होंने खुद को आदिमजाति कल्याण विभाग के उपसंचालक कार्यालय में अटैच भी करवा लिया। यहां छात्रवृत्ति शाखा में रहकर इन्होंने करीब 50 लाख से अधिक का गबन किया, जिसकी शिकायत पर पुलिस ने छानबीन की थी, तब शिकायत सही पाई गई थी। फर्जीवाड़ा और गड़बड़ी के मामलों में पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था। बताया जा रहा है कि स्कूल संचालक रामायण साहू फर्जीवाड़े के कई मामले में संलिप्त होने के कारण महीनों से निलंबित है।
स्कूल में फर्जीवाड़े का खेल अभी भी जारी
बाला जयंती मोमोरियल पब्लिक स्कूल डोंगरी में फर्जीवाड़े का खेल अभी भी जारी है। शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग से इस स्कूल को संस्कृत विद्यालय संचालित करने की मान्यता मिली है, जबकि गलत जानकारी देकर शासन से मान्यता हथियाने के बाद संचालक रामायण साहू इस स्कूल में विभिन्न विषयों की सभी कक्षाओं का धड़ल्ले से संचालन कर रहा है। स्कूल के प्राचार्य के अनुसार,चालू शिक्षा सत्र में वहां विद्यार्थियों की दर्ज संख्या करीब पांच सौ बताई जा रही है, जबकि असल में सौ-डेढ़ सौ से ज्यादा विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। इससे साफ है कि यहां हर साल विद्यार्थियों की दर्ज संख्या अधिक दर्शाकर संचालक रामायण साहू द्वारा शासन से मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
स्कूल की जांचकर उचित कार्यवाही करेंगे
बाला जयंती मोमोरियल पब्लिक स्कूल डोंगरी को किन-किन विषयों की मान्यता शासन से मिली है, यह मान्यता संबंधी दस्तावेज देखने के बाद ही स्पष्ट होगा। रही बात, छात्रवृत्ति और अन्य गड़बडिय़ों की तो मुझे मालूम है कि इन सब मामलों में स्कूल संचालक रामायण साहू पहले जेल जा चुका है। यदि अभी भी वहां उसी तरह की गड़बड़ी हो रही है तो स्कूल की जांचकर उचित कार्यवाही करेंगे।

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