सक्ती. पितृमोक्ष श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन गर्ग (डालमिया) परिवार द्वारा 23 अगस्त से 30 अगस्त तक किया जा रहा है। ब्यास पीठ पर गोस्वामी गोविन्द बाबा द्वारा बताया गया कि मनुष्य को अपने जीवन में किसी भी वस्तु एवं चीज का अंहकार नहीं करना चाहिए। जिस तरह भगवान ने तीन पग जमीन दान में मांगकर बाली का घमंड तोड़ दिया, क्योकि उन्होंने एक पग में पूरी धरती तथा दूसरे पग में आसमान नापकर एवं तीसरे पग के लिए स्थान पूछे जाने पर बाली ने अपने सिर पर पग रखकर अपना वचन पूर्ण करने की बात कही, उसे उसके दिए हुए वचन के अनुसार अपने तीसरे पग से लांघकर पताल में पहुंचकर लोगों को उसकी राक्षसी प्रवृत्ति से निजात दिलाई। उसी तरह हमेशा संसार में अंहकार का किसी न किसी रूप में निराकरण करने के लिए देवगण अवतार लेकर जनमानस को उससे मुक्ति दिलाते हैं।
आगे गोविन्द बाबा ने बताया कि देवकी विवाह के समय कंस ने धूमधाम से उसका विवाह किया था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस का मृत्यु का कारण बनेगी, तब से कंस ने अपनी बहन देवकी एवं वासुदेव को कारागार में डालकर उनकी होने वाली हर औलाद को मृत्यु के आगोश में भेज दिया, लेकिन जब आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने पर वासुदेव उसे कारागार से टोकरी में डालकर उफनी जमुना नदी पारकर गोकुल पहुंचकर नंदबाबा को सौंपकर उनकी पुत्री को वापस लेकर कारागार में पहुंचे, तब उसे ही कंस ने यशोदा की आठवीं संतान मानकर मरवा दिया, जबकि उसकी आठवीं संतान के रूप में कंस की मौत गोकुल में नंदबाबा के यहां बड़ी हो रही थी। आयोजन स्थल पर श्रीकृष्ण जन्म के अवसर पर आकर्षक झॉकी के माध्यम से इस प्रसंग को प्रस्तुत किया गया, जहां उपस्थित श्रद्धालु द्वारा श्रीकृष्ण जन्म पर एक दूसरे को बधाईयां देकर श्रीकृष्ण जन्म उत्सव की खुशियां मनाई गई। इस अवसर पर छप्पन भोग का प्रसाद श्रीकृष्ण को लगाया गया। सत्यविद्या वाटिका में आयोजित इस आयोजन के दौरान गर्ग डालमिया परिवार के घासीराम अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, मांगेराम अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, बाबूलाल अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, कैलाश, प्रदीप, राजकुमार, मुकेश, पवन, रामकिशन एवं अन्य लोग उपस्थित थे। आयोजन के दौरान प्रतिदिन कथा स्थल पर भक्तजन पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं।

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