राजेन्द्र राठौर @ जांजगीर-चांपा. जिले में पांच गौशालाएं संचालित है। इन गौशालाओं की स्थिति भी धमधा के राजपुर गौशाला जैसी है। जिले में संचालित गौशालाओं को गोसेवा के नाम पर लाखों रुपए का बजट भी मिला है, लेकिन इन गौशालाओं में गोसेवा के नाम पर लूटमार मची हुई है।
उल्लेखनीय है कि जिले के कुछ गौशालाओं में तो क्षमता से अधिक गायों को ठूंस-ठूंसकर रखा गया है, जिससे स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। बड़ी बात यह है कि जिले की गौशालाएं भी सत्ता पक्ष से जुड़े भाजपा नेताओं के पास ही है, जिसके कारण गौशालाओं की देखरेख कागजों में ही चल रही है। जिले में गौशालाओं की देखरेख के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है। गौशालाओं का रखरखाव चौकीदारों के भरोसे ही चल रहा है, जिसके कारण सभी गौशालाओं की स्थिति बदहाल है। गोसेवा के नाम पर गौशालाओं को हर साल लाखों रुपए का अनुदान तो मिल रहा है, लेकिन यहां सुविधाओं में विस्तार नहीं हो रहा है। यही वजह है कि जिले की गौशालाओं में तंग जगह पर क्षमता से अधिक गायों को ठूंसकर रखा गया है। यहां चारा-पानी तक की व्यवस्था ढंग की नहीं है। ऐसी स्थिति में कभी भी धमधा जैसी घटना जिले में सामने आ सकती है।
भाजपा नेता चला रहे गौशाला
जिले में संचालित पांच में से अधिकांश गौशालाओं को सत्ता पक्ष से जुड़े भाजपा नेता ही चला रहे हैं, जिसके कारण अफसरों को ही गौशालाओं के आय-व्यय की जानकारी नहीं मिल रही है। पूरी जानकारी गोपनीय रखी जाती है। जबकि इन गौशालाओं को चार साल के भीतर लाखों रुपए का शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। इन गौशालाओं में गोसेवा के नाम पर लूटखसोट जारी है।
सर्वाधिक फंड चांदी पहाड़ को
राज्य शासन ने गायों की देखरेख के लिए जिले की पांचों गौशालाओं को जमकर अनुदान दिया है। चार वर्षों के भीतर सबसे ज्यादा अनुदान चांदी पहाड़ आश्रम गोसेवा समिति जांजगीर को 59 लाख 47 हजार रुपए दिया गया है। चांदी पहाड़ आश्रम गोसेवा समिति ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उसके हिसाब से वहां 410 गायों को रखना बताया गया है। दूसरे नंबर पर जय मां चंद्रहासिनी गौशाला समिति जांजगीर का नाम है, इस गौशाला को 22 लाख 27 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ है, यहां 370 गायों को रखने की जानकारी शासन को दी गई है। इसी तरह जय मां सिदारिन दाई गौशाला समिति चंदेली को 20 लाख रुपए, भारतीय कुष्ठ निवारण संघ जांजगीर को 12 लाख 42 हजार रुपए तथा जय मां चंद्रहासिनी समिति हरदीडीह को पांच लाख 19 हजार रुपए का अनुदान चार वर्ष के भीतर प्राप्त हुआ है।
कुछ में गायों की जानकारी नहीं
राज्य शासन ने जिन गौशालाओं को भारी भरकम अनुदान दिया है, उनमें से कई गौशालाओं की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। कुछ गौशालाओं की अनुदान की राशि और गायों की संख्या में भारी अंतर है। वहीं कुछ गौशाला में जहां गायों की जानकारी ही नहीं है तो कहीं अनुदान राशि का जिक्र भी नहीं है। खबर ये भी कि बीेते कई सालों से गौशालाओं की ऑडिट तक नहीं हुई है। हालांकि धमधा के राजपुर गौशाला में हुई घटना के बाद प्रदेश के पशुपालन मंत्री ने गौशालाओं की जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद खुलासा होगा कि आखिर कहां-कहां किस स्तर पर गड़बड़ी और आर्थिक अनियमियता हुई है, लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि गोरक्षा के नाम पर जमकर घोटाला हो रहा है।
फैक्ट फाइल
समिति का नाम अनुदान राशि गायों की संख्या
⇛ चांदी पहाड़ आश्रम गौसेवा समिति जांजगीर 59 लाख 47 हजार 410 गाय
⇛ जय मां चंद्रहासिनी गौशाला जांजगीर 22 लाख 27 हजार 370 गाय
⇛ जय मां सिदारिनदाई गौशाला चंदेली 20 लाख 384 गाय
⇛ भारतीय कुष्ठ निवारक संघ जांजगीर 12 लाख 42 हजार 173 गाय
⇛ जय मां चंद्रहासिनी समिति हरदीडीह 5 लाख 19 हजार 127 गाय
⇛ जय मां चंद्रहासिनी गौशाला जांजगीर 22 लाख 27 हजार 370 गाय
⇛ जय मां सिदारिनदाई गौशाला चंदेली 20 लाख 384 गाय
⇛ भारतीय कुष्ठ निवारक संघ जांजगीर 12 लाख 42 हजार 173 गाय
⇛ जय मां चंद्रहासिनी समिति हरदीडीह 5 लाख 19 हजार 127 गाय

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