राजेंद्र राठौर @ जांजगीर-चांपा. राजनीति अब केवल बड़ों के हाथ की कठपुतली नहीं, बल्कि बच्चों का भी अधिकार होगा। वे भी बाल विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष यानी ऑनरेबल स्पीकर और बाल नेता प्रतिपक्ष बन सकेंगे। स्कूली बच्चों में नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास पर फोकस करते हुए बाल आयोग ने एक नई पहल करने का निर्णय लिया है। इसके तहत स्कूलों में पढऩे वाले 14 से 16 साल तक की आयु वाले छात्र-छात्राओं का चयन कर बाल विधानसभा का गठन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अब तक आपने अपने जनप्रतिनिधियों को ही सदन में गरमागरम बहस करते देखा है। शासकीय योजनाओं का बखान करने वाले मंत्री जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर तो नाराज विपक्ष सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा करते विधायक सुर्खियां बटोरते देखे जाते हैं। गांधी टोपी, खादी का बंडी और कुर्ता-पाजामा पहने राजनीति करते शाख्सियतों के बाद अब पहली बार स्कूल यूनिफार्म में बच्चों को भी वहीं भूमिका निभाने का मौका देने की तैयारी की जा रही है। बच्चों में लीडरशीप यानि नेतृत्व क्षमता विकसित करने की साथ उनके व्यक्तित्व में निखार लाने का उद्देश्य लेकर यह प्रयोग बाल आयोग ने सुझाया है। इसके तहत स्कूलों में पढऩे वाले चुनिंदा छात्र-छात्राओं को उनकी योग्यता और निर्धारित मापदंड के आधार पर पात्रता प्रदान की जाएगी।
शीतकालीन, मानसून और बजट सत्र भी
राज्य की विधानसभा की तरह ही बाल विधानसभा में भी शीतकालीन सत्र, मानसून सत्र और बजट सत्र आयोजित होगा, जिसमें सरकार के प्रस्तावों और विभिन्न मुद्दों पर बाल सरकार और बाल विपक्ष के बीच गरमागरम बहस छिड़ेगी। सत्र में जिन भी बातों पर चर्चा होगी, उसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजी जाएगी। बताया जा रहा है कि इससे पहले उत्तराखंड और आंध्रप्रदेश में बाल विधानसभाओं का गठन किया जा चुका है और उन्हीं की तर्ज पर छग राज्य में भी यह कांसेप्ट लाया जा रहा है। अगर यहां भी बाल विधानसभा गठित कर ली गई और बाल सदन में कार्रवाई शुरू हुई तो छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य होगा, जहां यह कॉन्सेप्ट लागू होगा।
भाग ले सकेंगे सरकारी स्कूल के छात्र
बाल विधायक चुनने तय प्रारूप के तहत सभी जिलों की 90 विधानसभा सीटों में एक प्रतियोगी परीक्षा होगी, जिनके दायरे में संचालित सरकारी स्कूल के छात्र भाग ले सकेंगें। यह का मौका केवल शासकीय हाई स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को दिया जाएगा। कक्षा 9वीं या 10वीं के ऐसे विद्यार्थी, कक्षा में जिनकी उपस्थिति कम से कम 75 फीसदी होगी, वे प्रतियोगिता में भाग लेने के पात्र होंगे। जिले में गठित एक कमेटी बाल विधायकों का चुनाव करेगी। सभी जिलों से बाल विधायक चुन लिए जाने के बाद बाल मंत्रिमंडल गठन करने उन्हे राजधानी रायपुर आमंत्रित किया जाएगा और वे अपना मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विपक्षी दलों के नेता यानि नेता प्रतिपक्ष चुनेंगे।
तीन वर्ष की कार्यकाल वाली सरकार
बाल विधानसभा में विधायक, मंत्री व उनकी सरकार का कार्यकाल तीन साल का होगा। 90 सीटों की बाल विधानसभा में जनता का नेतृत्व करने वाली नेत्रियों के लिए 50 फीसदी सीट छात्राओं की होगी। इस विधानसभा में छात्र-छात्राएं बाल विधायक, बाल मंत्री, बाल सीएम, बाल विधानसभा अध्यक्ष और बाल नेता प्रतिपक्ष बनाए जाएंगे। स्कूलों से चुने गए 14 से 16 वर्ष तक की आयु के छात्र-छात्राओं को विधायक और उन्हें मिलाकर बाल विधानसभा का गठन होगा, जो पक्ष में रहकर सरकार और विपक्षी दलों में शामिल होकर प्रतिपक्ष की भूमिका निभाते नजर आएंगे। इस तरह वे छत्तीसगढ़ विधानसभा और सरकार की कार्रवाई से भी रूबरू होंगे।

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