राजेन्द्र राठौर @ त्वरित टिप्पणी. मशहूर शायर निदा फाजली साहब ने क्या खूब लिखा है-बात कम कीजिए, जहानत को छुपाते रहिये, अजनबी शहर है यह, दोस्त बनाते रहिये, दुश्मनी लाख सही, खत्म न कीजिए रिश्ता, दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिये... यह शायरी मौजूदा दौर में जिले के भाजपा नेताओं पर बिल्कुल फिट बैठ रही है, तभी तो कभी सांप और नेवले की तरह एक-दूसरे से लडऩे-भिडऩे वाले भाजपा नेता पिछले कुछ दिनों से एक-दूसरे के कंधे पर हाथ डालकर चल रहे हैं। चले भी क्यों नहीं, ऐसा करने के लिए केन्द्रीय और राज्य नेतृत्व ने हिदायत जो दे रखी है। संभवत: यही मजबूरी है कि इन दिनों हो रही भाजपा की बैठकों में जिले के सभी दिग्गज नेता एक साथ, अलग-बगल की कुर्सियों में देखे जा रहे हैं।
यह एका आज इसलिए दिख रही है, क्योंकि कहीं न कहीं भाजपा के निचले स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व को विरोधी दलों की सक्रियता का अहसास हो गया है और उन्हें कुर्सी छिन जाने का भय सताने लगा है। एक ओर जहां भाजपा प्रदेश में चौथीं पारी का सपना संजोए हुए है। वहीं कांग्रेसी भी पूरे दमखम के साथ आगामी विधानसभा चुनाव लडऩे के मूड में है। चांपा में पिछले दिनों हुई विधानसभा स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस प्रदेश में इस बार हर हाल में सरकार बनाएगी। कांग्रेस नेताओं के इस दावे ने अब भाजपा नेताओं को सोंचने पर मजबूर कर दिया है, तभी तो कुछ समय पहले तक एकला चलो का राग अलापने वाली क्षेत्रीय सांसद अब उन सभी लोगों को साथ लेकर चलने की बात कह रही हैं, जो राजनीति के क्षेत्र में कभी उनके जानी दुश्मन हुआ करते थे, लेकिन मौजूदा पस्थितियां बदली-बदली नजर आ रही है। क्योंकि सांसद महोदया, अब उन सभी लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का दावा कर रही हैं, जो उन्हें कभी फूटे आंखों नहीं भाते थे।
राजनीति के गलियारों में चर्चा यहां तक थी कि भाजपा के स्थानीय नेताओं में मतभेद इसकदर था कि यदि कोई नेता किसी रास्ते से गुजर जाए तो दूसरा नेता बिल्कुल उस तरह अपने पैर पीछे कर लेता था, जिस तरह बिल्ली के रास्ता काटने के बाद अंधविश्वासी लोग किया करते हैं। जिले की राजनीति में अपना सिक्का चलाने भाजपा के अमूमन सभी स्थानीय नेताओं ने एक से बढक़र एक प्रपंच रचे और एक-दूसरे का नीचा दिखाने कोई कसर नहीं छोड़ी। सांप और नेवले की तर्ज पर चली लड़ाई में विधानसभा चुनाव को जैसे-तैसे चार साल गुजर गए और अब फिर से चुनावी बयार आने वाली है। ऐसे में भाजपा के दिग्गज नेताओं ने स्थानीय नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर गंभीरतापूर्वक एक साथ कदमताल करने की नसीहत दी है।
इस संदर्भ में आज चर्चा इसलिए की जा रही है, क्योंकि मीडिया के माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकार की उपलब्धियां आमलोगों तक पहुंचाने जिले के सभी भाजपा नेता, चाहे वह सांसद हो, पूर्व विधायक या फिर संसदीय सचिव अथवा पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष एक ही जगह एक साथ नजर आएं हैं। इस बात को लेकर जनचर्चा भी है कि पहली बार इन नेताओं को एक-साथ और एक-दूसरे से मुस्कुराकर बात करते देखा गया है, क्योंकि इससे पहले ये नेता एक-दूसरे से मुंह फेरकर चलते थे। खैर, बात चाहे जो भी हो, लेकिन भाजपा के केन्द्रीय और राज्य नेतृत्व से हिदायद मिलने के चलते यहां आज ‘दिल मिले या न मिले, मगर हाथ मिलाते रहिये’ वाली कहावत जरूर चरितार्थ हुई है।

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