राजेन्द्र राठौर@जांजगीर-चांपा. पिछले डेढ़ दशक से सत्ता से दूर कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में हर हाल में अधिक से अधिक सीट जीत कर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने की कवायद कर रही है। इसी उद्देश्य को लेकर पिछले दिनों चांपा में विधानसभावार प्रशिक्षण कार्यक्रम भी रखा गया था, जिसमें जांजगीर-चांपा विधानसभा के तकरीबन 100 बूथ प्रभारियों ने मौजूदा विधायक मोतीलाल देवांगन की खुलकर खिलाफत की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित अमूमन सभी बूथ प्रभारियों ने प्रदेशाध्यक्ष भूपेश बघेल सहित अन्य दिग्गज नेताओं के समक्ष अपने मन की भड़ास निकालते हुए साफ तौर पर कहा है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में जांजगीर-चांपा सीट पर प्रत्याशी की पुनर्वृत्ति की जाती है तो भारी मतों से हारना तय है। बूथ प्रभारियों के आक्रोश को ध्यान में रखते हुए पार्टी हाईकमान ने विधायक को समय रहते अपने व्यवहार में सुधार लाने की नसीहत दी है। बताया जा रहा है कि इसके बाद भी उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आता है तो उनका घर बैठना तय है।
कांग्रेस पार्टी से जांजगीर-चांपा विधानसभा से उम्मीदवारी करने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। पार्टी में चार दिन पहले शामिल होने वाला भी खुद को प्रबल दावेदार बता रहा है। वहीं पार्टी से जुड़े कुछ लोग मौजूदा विधायक मोतीलाल देवांगन की पार्टी हाईकमान तक अच्छी पकड़ होने का हवाला देते हुए उन्हें पांचवीं बार इस सीट से रिपीट किए जाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच जनता और कार्यकर्ताओं के मध्य उनकी नकारात्मक छवि आड़े आ रही है। मतदाताओं की बात करें तो जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश मतदाता शुरू से ही मौजूदा विधायक देवांगन की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। लिहाजा, मतदाता भी चाहते हैं कि परंपरागत प्रत्याशी को बदलकर अब नए चेहरे को मौका दिया जाए, क्योंकि वे भी उसी-उसी चेहरे को पिछले बीस वर्षों से देखकर पूरी तरह से उब चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी इस बार जांजगीर-चांपा विधानसभा में अमूलचूल परिवर्तन चाह रहे हैं। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव के करीब एक साल पहले से ही प्रत्याशी बदले जाने की मांग बड़ी तेजी से मुखर हो रही है। यहां बताना लाजिमी होगा कि कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर प्रदेशाध्यक्ष भूपेश बघेल ने पिछले दिनों प्रदेशभर में विधानसभावार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। जिले के छहों विधानसभा का प्रशिक्षण कार्यक्रम चांपा के देवांगन धर्मशाला में हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के दिग्गज नेताओं के साथ ही जिले के विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व प्रत्याशी सहित तमाम जनप्रतिनिधि व बूथ प्रभारी शामिल हुए। इस दौरान विधानसभावार उनकी राय ली गई।
बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में नेताओं ने आगामी चुनाव को लेकर टिप्स देने के बाद बूथ प्रभारियों की मंशा जानने के उद्देश्य से कुछ प्रश्नों को लेकर उनसे वोटिंग भी कराई। इस दौरान जांजगीर-चांपा विधानसभा के करीब 100 बूथ प्रभारियों ने मौजूदा विधायक देवांगन की खुलकर खिलाफत की। बूथ प्रभारियों ने साफ तौर पर कहा कि विधायक देवांगन में न तो नेतृत्व क्षमता है और न ही वे कुशल राजनीतिज्ञ बन सकें हैं। बूथ प्रभारियों ने यह भी कहा कि वर्ष 2013 में चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद से उनके रवैये में खासा परिवर्तन आया है, जिसकी वजह से वे पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर कदमताल करने के बजाय खुद को सर्वेसर्वा बताने की ज्यादा कोशिश कर रहे हैं। बूथ प्रभारियों का यह भी कहना था कि यदि कांग्रेस जांजगीर-चांपा सीट से चुनाव जीतने की लालसा रखती है तो इस बार प्रत्याशी को बदलना ही होगा। पार्टी हाईकमान यदि जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर विधायक देवांगन को फिर टिकट देती है तो चुनाव जीतना तो भूल जाइए, जांजगीर-चांपा विधानसभा में कांग्रेस की क्या गति होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा। बताया जा रहा है कि पदाधिकारियों के साथ ही बूथ प्रभारियों से मिले सुझाव को पार्टी हाईकमान ने गंभीरता से लेते हुए विधायक देवांगन को समय रहते अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की नसीहत ही नहीं, बल्कि चेतावनी दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस नसीहत के बाद भी विधायक देवांगन के व्यवहार में यदि परिवर्तन नहीं आया तो निश्चित तौर पर उन्हें घर बैठना पड़ेगा। बहरहाल, विधानसभावार तीन चरणों में होने वाले सर्वे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सर्वे में प्राप्त सुझाव जांजगीर-चांपा विधानसभा के टिकट वितरण को लेकर अहम् भूमिका अदा कर सकता है।
ब्राह्मण समाज को मिल सकता है अवसर
कांग्रेस पार्टी से जांजगीर-चांपा विधानसभा से टिकट को लेकर ब्राह्मण समाज के कई नामचीन लोग पूरी जोर आजमाइश कर रहे हैं। कुछ समय पहले तक इस बात की चर्चा बड़े जोरशोर से चल रही थी कि जिला पंचायत के पूर्व सदस्य दिनेश शर्मा भी इस सीट से प्रबल दावेदार हैं, लेकिन जैसे ही उनके नाम को जिलाध्यक्ष पद से जोड़ा गया तो सारी संभावनाओं पर विराम लग गया। उनके बाद इस सीट से प्रबल दावेदार के रूप में कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि इंजी. रवि पाण्डेय का नाम चल रहा है। चंूकि पूर्व में इस सीट से पूर्व विधायक राजेश्री महंत डॉ. रामसुंदर को मैदान में उतारने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें बलौदाबाजार जिले के कसडोल सीट में समायोजित किए जाने की चर्चा के बाद फिलहाल इस वर्ग से इंजी. पाण्डेय को छोडक़र कोई और प्रबल दावेदार मैदान में नहीं बचा है। ऐसे में प्रबल संभावना बन रही है कि पार्टी हाईकमान ब्राह्मण समाज को एक अवसर देते हुए जांजगीर-चांपा सीट से युवातुर्क इंजी. पाण्डेय को चुनाव मैदान में उतार सकती है। नपाध्यक्ष ने बढ़ाई विधायक की धडक़न
वैसे तो जिले की राजनीति पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत के नाम से हमेशा से शुरू होती रही है। जिले के अधिकांश जनप्रतिनिधि डॉ. महंत के साथ लंबे समय तक कदम से कदम मिलाकर चलते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से राजनीतिक फिजां बदली हुई है। राजनीति के जानकारों की मानें तो पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. महंत के कभी खास लोगों में गिने जाने वाले मौजूदा विधायक देवांगन पिछले कुछ समय से उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं। चर्चा यहां तक है कि पूर्व मंत्री डॉ. महंत यदि किसी काम से चांपा या जांजगीर पहुंचते भी हैं तो उनकी मुलाकात विधायक देवांगन से नहीं होती। ऐसी स्थिति में डॉ. महंत अब नगरपालिका चांपा के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल को प्रोजेक्ट कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि नपाध्यक्ष अग्रवाल ने जांजगीर-चांपा सीट से गुपचुप ढंग से चुनावी तैयारियां भी प्रारंभ कर दी है। वे इस बार अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं कि जांजगीर-चांपा सीट से उन्हें चुनाव लडऩे का अवसर मिले। इससे मौजूदा विधायक देवांगन की धडक़नें और बढ़ी हुई हैं।
टिकट को लेकर कुर्मी व साहू फैक्टर हावी
जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र में कुर्मी और साहू समाज के मतदाताओं की संख्या अन्य समाज से कहीं ज्यादा है। इसलिए इस सीट से टिकट को लेकर अमूमन सभी राष्ट्रीय दलों में कुर्मी और साहू फैक्टर भी इस बार हावी दिख रहा है। चूंकि भाजपा ने कुर्मी समाज से ताल्लुक रखने वाले नारायण चंदेल को लगातार चार बार अवसर दिया है। ऐसे में इस बार कांग्रेस भी इस समाज को ध्यान में रखकर टिकट फाइनल करने की सोंच रही है। बताया जा रहा है कि चुनाव के पहले यदि कुर्मी फैक्टर हावी रहा तो कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भूपेश बघेल एवं राज्यसभा सांसद छाया वर्मा की पहली पसंद जिला पंचायत सदस्य ज्योति किशन कश्यप को यहां से मैदान में उतारा जा सकता है। वहीं साहू समाज से भी कुछ नामों की चर्चा है, लेकिन इस वर्ग के लोग पूरी दमदारी के साथ अब तक खुद को प्रोजेक्ट नहीं कर पाए हैं।बूथवार सर्वे करेगा किस्मत का फैसला
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधानसभावार प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राप्त हुए फीडबैक के आधार पर कांग्रेस अब आगे की रणनीति बना रही है। इसकी शुरूआत आगामी दिसम्बर माह से होगी। दिसम्बर से मई 2018 तक तीन चरणों में बूथवार सर्वे होना है। इस दौरान विधानसभावार एक-एक बूथ का सर्वे करवाया जाएगा, जिसमें न केवल पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं से सुझाव लिए जाएंगे, बल्कि आमजनता से भी भावी प्रत्याशी को लेकर सलाह-मशवरा किया जाएगा। ऐसे में अभी से आगामी मई तक का समय विधायक देवांगन के लिए अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने का अंतिम अवसर हो सकता है। यदि सर्वे में उनके नाम को लेकर अधिक आपत्तियां मिलती है तो पार्टी हाईकमान निश्चित तौर पर इस बार उन्हें किनारा लगा देगा। इस बात की चिंता भी विधायक देवांगन को सता रही है।



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