जांजगीर-चांपा. जिला सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव के निर्देश पर प्राधिकरण की सचिव शुभदा गोयल द्वारा 24 अक्टूबर को उपजेल सक्ती का निरीक्षण किया गया। इस दौरान वहां विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन भी किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शुभदा गोयल ने बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन (सि.) क्रमंाक 406/2013 में जेलों की स्थिति एवं बंदियों के संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में प्राधिकरण के अध्यक्ष के निर्देश पर उप जेल सक्ती का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद सभी बंदियों को एकत्रित कर उन्हें उनके विधिक अधिकारों तथा नि:शुल्क विधिक सहायता योजना के बारे में बताया गया। शिविर में बंदियों को बताया गया कि यदि उनकी ओर से न्यायालय में पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं हैं तो वे उपजेल सक्ती के माध्यम से अपना अनुरोध पत्र प्राधिकरण को प्रेषित करें, ताकि नियमानुसार उनकी ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त किया जा सके। प्राधिकरण की सचिव गोयल ने बताया कि जब कभी भी न्यायालय द्वारा निर्णय पारित कर दंडादेश दिया जाता है तो निर्णय की एक प्रति नि:शुल्क दोषसिद्ध बंदी को उपलब्ध कराई जाती है। बंदियों को निर्णय की वह प्रति लेकर सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि जब कभी निर्णय के विरूद्ध ऊपरी न्यायालय में अपील करना हो तो उस प्रति को प्रस्तुत किया जा सके।

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