एफआईआर के बाद डीएमसी सहित सभी आरोपी भूमिगत राजीव गांधी शिक्षा मिशन में हुए विद्युतीकरण घोटाले का मामला
जांजगीर-चांपा. राजीव गांधी शिक्षा मिशन में हुए लाखों के विद्युतीकरण घोटाला मामले में एफआईआर दर्ज होने के दो माह बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। कोतवाली थाना में अपराध दर्ज होने के बाद से आरोपी डीएमसी समेत सभी घोटालेबाज भूमिगत हो गए हैं, जिनकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस कोई रूचि नहीं दिखा रही है
गौरतलब है कि जिले में संचालित शासकीय स्कूलों में वर्ष 2011-12 के दौरान विद्युतीकरण के कार्यों में वित्तीय अनियमितता से संबंधित शिकायत बीते 25 नवंबर को शिक्षा विभाग के सहायक परियोजना अधिकारी विजय उपाध्याय ने जांजगीर थाने में पहुंचकर दर्ज कराई थी। शिकायत के साथ जिला प्रशासन द्वारा कराए गए जांच का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें बताया गया था कि वर्ष 2011-12 में 501 शालाओं के विद्युतीकरण कार्य के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को दायित्व सौंपा गया था, जिसमें से 349 भवनों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कराया गया। वहीं 52 शाला भवन विद्युतीकरण योग्य नहीं होने तथा अन्य 100 शाला भवनों में विद्युतीकरण कार्य अपेक्षित मानक पर नहीं किए जाने के कारण उसकी स्वीकृति 45.60 लाख रुपए शिक्षा मिशन को वापस किया गया था। इसके बाद भी सौ विद्यालयों में कार्य पूर्ण होना बताकर डीएमसी प्रमोद आदित्य, पूर्व वित्त समन्वयक एमडी दीवान द्वारा तत्कालीन कलेक्टर ओपी चौधरी एवं जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ विश्वेश कुमार के हस्ताक्षर को स्कैन कर राशि भुगतान के लिए अनुमोदित बताते हुए 30 लाख रुपए का चेक दो सितम्बर 2015 को ठेकेदार राजेश अग्रवाल को जारी किया गया था। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में बीते छह दिसम्बर को डीएमसी आदित्य, ठेकेदार अग्रवाल समेत कुल सात लोगों के खिलाफ धारा 409, 420, 120बी तथा 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। एफआईआर दर्ज होने के दो माह बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। थाने में अपराध दर्ज होने के बाद डीएमसी समेत सभी घोटालेबाज भूमिगत हो गए हैं, जिनकी खोजबीन कर गिरफ्तारी करने पुलिस रूचि नहीं ले रही है।
ले-देकर हुई थी एफआईआर
यह मामला जून 2016 में जब मीडिया के जरिए उजागर हुआ, तब उच्चाधिकारी इस मामले को बहुत हल्के में ले रहे थे। इसी बीच राजीव गांधी शिक्षा मिशन के संपूर्ण कामकाज व भुगतान की आडिट के लिए शासन स्तर से टीम पहुंची, तब भी अधिकारी इसे रूटिन आडिट बता रहे थे। मामला तब तूल पकडऩे लगा, जब कुछ राजनीतिक दलों ने धरना-आंदोलन कर प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। तब कहीं जाकर प्रशासन ने जांच टीम गठित की। टीम ने करीब तीन माह जांच करने के बाद रिपोर्ट दी। इस तरह एफआईआर दर्ज होने में छह माह का समय लग गया था।
यह कह रही कोतवाली पुलिस
कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अभी जितने दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, उसके आधार पर कोतवाली पुलिस ने संबंधितों के विरूद्ध अपराध तो दर्ज कर लिया है, लेकिन थाने में उपलब्ध कागजात आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त नहीं बताए जा रहे हैं। कोतवाली थाना प्रभारी का कहना है कि शिक्षा विभाग ने पहले ही मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने में विलंब किया, जिसके कारण ही मामला दर्ज नहीं हो रहा था। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी समेत जिला प्रशासन के अफसरों को कई बार सूचित किया गया था। शिक्षा विभाग के सहायक परियोजना अधिकारी ने बीते 25 नवंबर को थाने पहुंचकर जो दस्तावेज उपलब्ध कराए, उसके आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया अपराध प्रकट होना पाया और संबंधितों के खिलाफ अपराध दर्ज किया। उनका कहना है कि गिरफ्तारी से पहले कुछ औपचारिकताएं व कागजात की और जरूरत है, जिसका इंतजार किया जा रहा है।
औपचारिकता पूरी कर रहे
राजीव गांधी शिक्षा मिशन में हुए विद्युतीकरण घोटाला मामले में संलिप्त लोगों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने के बाद आगे की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
-अजय यादव, पुलिस अधीक्षक, जांजगीर
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