गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

युवा वैज्ञानिक ने बनाया ऐसा फिल्टर कि कम खर्च में मिलेगा शुद्ध पानी, फिल्टर को पेटेंट कराने की प्रक्रिया पूरी

नवागढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम सेमरा का निवासी है युवा वैज्ञानिक निमेष सिंह

 

नवीन कदम ब्यूरो@जांजगीर-चांपा. प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, इस कहावत को ग्राम सेमरा के एक युवा वैज्ञानिक ने चरितार्थ कर दिखाया है। उसने ऐसा वाटर फिल्टर इजाद किया है, जिसके उपयोग से बहुत कम खर्च में शुद्ध पानी मिलेगा। वाटर फिल्टर को पेंटेट कराने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वैज्ञानिक का कहना है कि उनका उत्पाद जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो जाएगा।

जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम सेमरा की पहचान जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर बनने जा रही है, क्योंकि यहां के युवा वैज्ञानिक निमेष सिंह ने बहुत कम लागत का एक ऐसा वाटर फिल्टर तैयार किया है, जिसे जेब में रखकर कहीं भी उपयोग में लाया जा सकता है। युवा वैज्ञानिक निमेष ने इस संबंध में गुरूवार को जिला मुख्यालय जांजगीर के एक हॉटल में प्रेसवार्ता रखकर फिल्टर से संबंधित संपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग जो पानी का उपयोग करते हैं, वह शुद्ध नहीं होता। शुद्ध पानी के लिए लोगों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है, जिसके कारण लोग पीछे हट जाते हैं। 

ऐसे ही लोगों को कम लागत पर शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने के लिए उन्होंने छोटे साइज का वाटर फिल्टर तैयार किया है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा तैयार किया गया वाटर फिल्टर बाल पेन की साइज का है, जिसे जेब में रखकर कहीं भी उपयोग किया जा सकता है। इस फिल्टर की कीमत भी बहुत कम है। बाजार में यह फिल्टर अधिकतम तीन सौ रुपए में उपलब्ध होगा। 

युवा वैज्ञानिक ने आगे बताया कि अक्सर ऐसा होता है कि लोग खेत या फिर कही बाहर जाए रहते हैं, तब उन्हें तालाब या फिर नदी-झरने का पानी पीना पड़ता है, ऐसे लोगों के लिए उनके द्वारा तैयार किया गया वाटर फिल्टर बहुत ही कारगर साबित होगा। 

इसके साथ ही आम लोग अपने घरों में मिनी वाटर फिल्टर का बड़ी आसानी से उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वाटर फिल्टर को पेटेंट कराया जा चुका है। वाटर फिल्टर निर्माण के लिए अहमदाबाद की एक कंपनी से टाईअप किया गया है। वहां से लोगों की मांग के अनुसार वाटर फिल्टर की आपूर्ति देश भर में की जाएगी।
 

सागर विवि से की पीएचडी

युवा वैज्ञानिक निमेष सिंह ने मध्यप्रदेश के सागर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर अर्चना पाण्डेय के मार्गदर्शन में पीएचडी पूरी की है। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक पढ़ाई टीसीएल कॉलेज जांजगीर से पूरी हुई। यहां से बीएससी करने के बाद उन्होंने रायपुर से एमएससी की पढ़ाई की। इसके बाद देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों में जाकर उन्होंने अपना अध्यापन कार्य जारी रखा। बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के संपर्क में आने के बाद उन्हें मिनी वाटर फिल्टर तैयार करने की प्रेरणा मिली। देश के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा कई विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन में उन्होंने इस वाटर फिल्टर का निर्माण किया।
 

चार से पांच माह का समय

वैज्ञानिक निमेष सिंह ने बताया कि मिनी वाटर फिल्टर तैयार करने में उन्हें चार से पांच माह का समय लगा। काम पूरा होने के बाद उन्होंने उसकी टेस्टिंग की। वाटर फिल्टर को टेस्ट के लिए कई प्रयोगशालाओं में भेजा गया, जहां से ओके रिपोर्ट मिलने के बाद पेटेंट करवाने की औपचारिकताएं पूरी की गई। उन्होंने बताया कि करीब पखवाड़े भर के भीतर उनके द्वारा तैयार किया गया मिनी वाटर फिल्टर बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि इस फिल्टर का उपयोग खासकर, सैनिक, पुलिस के जवान, किसान सहित उन वर्ग के लोगों के लिए अत्यधिक लाभप्रद होगा, जो अक्सर घर से बाहर रहते हैं और उन्हें नदी-तालाब आदि का पानी पीने के लिए विवश होना पड़ता है।
 

मदद करने में भी पीछे नहीं

युवा वैज्ञानिक निमेष सिंह ने महीनों तक शोध कर वाटर फिल्टर तथा पैरासिटामॉल तैयार किया है, जो लोगों के लिए लाभप्रद तो है ही। साथ ही वे ऐसे लोगों की मदद करने तत्पर हैं, जो गांव-देहात में रहकर कई महत्वपूर्ण चीजें बनाते तो हैं, लेकिन उन्हें लोगों तक नहीं पहुंचा पाते। पेटेंट नहीं होने के कारण वे उस पर हक भी जता नहीं पाते। ऐसे लोगों की मदद के लिए उन्होंने माई बिग आइडियास डाट इन नामक बेवसाइट तैयार किया है, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने आइडिया भेज सकता है। उसके बाद उसे पेटेंट कराकर संबंधित को देश भर में पहचान दिलाने का बीड़ा युवा वैज्ञानिक निमेष ने उठाया है।

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