बुधवार, 19 अप्रैल 2017

अधिकांश विभाग के अफसर थे गायब, नगरवासियों ने किया समाधान शिविर का बहिष्कार

डोलकुमार@डभरा. नगर पंचायत डभरा में बुधवार को आयोजित लोक समाधान शिविर का नगरवासियों ने बहिष्कार कर दिया। शिविर में अधिकांश विभाग के अफसर गायब थे, जिससे आक्रोशित महिलाओं ने उपस्थित अधिकारिओं को बंधक बनाने का प्रयास भी किया। बाद में शिविर का बहिष्कार करते हुए सभी लोग वहां से चले गए।

राज्य सरकार द्वारा जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए एक तरफ  जहां लोक सुराज अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नुमाइंदे ही इस अभियान पर पलीता लगाने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला नगर पंचायत डभरा का है, जहां 19 अप्रैल को लोक सुराज अभियान के अंतर्गत समाधान शिविर का आयोजन वट सावित्री चौंक पर किया गया था। शिविर में बामुश्किल चार-पांच विभागों के अफसर ही पहुंचे थे, जबकि डभरा में करीब 25 से अधिक विभागों के दफ्तर संचालित हैं। शिविर में अधिकांश विभागों के अधिकारियों के नहीं पहुंचने से महिलाएं आक्रोशित हो गई। 

महिलाओं ने शिविर में मौजूद कुछ विभागों के अफसरों को घेरकर बंधक बनाते हुए जिम्मेदार अफसरों को शिविर में तत्काल बुलवाने की बात कही, इसकी सूचना कुछ अफसरों ने उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद भी अफसर वहां नहीं पहुंचे। इस वजह से महिलाएं एवं नगर के लोग समाधान शिविर का बहिष्कार कर अपने घर चले गए। शिविर मेें उपस्थित नायब तहसीलदार से नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अनिल चन्द्रा ने शिकायत करते हुए कहा कि शिविर में कई विभागों के अफसरों की अनुपस्थिति है, जिससे नगरवासियों की कई समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया, उसका जिम्मेदार कौन है? इस पर नायब तहसीलदार बंगले झांकते रहे। 

लोक समाधान शिविर में नायब तहसीलदार, विद्युत विभाग से जेई नरेश  देवागन, थाना प्रभारी केपी मरकाम, स्वास्थ्य विभाग, एकीकृत बाल विभाग के अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष नीलू अनिल चन्द्रा,  मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रहलाद पाण्डेय, पाषर्द एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। कुल मिलाकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे लोक सुराज अभियान के अंतर्गत समाधान शिविर का बहिष्कार होना शर्मनाक है। शिविर में उपस्थित मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रहलाद पाण्डेय से शिविर के बहिष्कार के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि शासन द्वारा अधिकारी-कर्मचारिओं को बयान देने से मना किया गया है।

आबकारी अफसर रहे नदारद

नगर पंचायत डभरा के शिविर में सबसे ज्यादा आवेदन आबकारी विभाग को दिए गए थे, लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ही गायब थे। इस कारण उपस्थित नगरवासियों के आवेदन का समाधान ही नहीं हो सका। वहीं उपस्थित महिलाओं ने एक बार फिर जोरशोर से शासकीय शराब दुकान का स्थल परिवर्तन करने का मुद्दा उठाया।

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