नवीन कदम एक्सक्लूसिव@जांजगीर-चांपा. जमीन की नई न्यूनतम कीमतें शासन ने जारी कर दी हैं, जो 1 अप्रैल से प्रभावी हो गई। शासन ने इस बार कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसका असर यह होगा कि लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराने पर अधिक शुल्क नही देना होगा।
हर साल नए वित्तीय वर्ष अप्रैल से मार्च तक के लिए शासन जमीन की न्यूनतम कीमतें जारी करता है। अगर कोई व्यक्ति जमीन का सौदा करता है तो शासन द्वारा तय कीमत से कम में खरीद-बिक्री का सौदा नहीं कर सकता है। इस लिहाज से जमीन सौदे में शासन द्वारा तय कीमतें बहुत अहम रहती है। अब तक हर साल शासन की ओर से जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी की जाती थी। इसके चलते नए वित्तीय वर्ष शुरू होते ही लोगों को पंजीयन शुल्क के रूप में शासन को अधिक राशि देने की मजबूरी थी। चालू वित्तीय वर्ष में शासन ने जमीन की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। सरकारी कीमतें यथावत् रखी गई हैं। इस तरह अब अगर कोई रजिस्ट्री कराता है तब भी उसे पिछले वित्तीय वर्ष जितना ही शुल्क देना होगा। इसमें किसी तरह का इजाफा नहीं हुआ है। इसे बड़ी राहत मानी जा रही है क्योंंकि वैसे ही रीयल इस्टेट का कारोबार ठंडा पड़ा है। ऐसे में जमीन की कीमतें और रजिस्ट्री शुल्क नहीं बढ़ने से लोगों को अधिक राशि खर्च नहीं करनी पड़ेगी।
त्रिस्तरीय मूल्यांकन व्यवस्था
जमीन की कीमतें निर्धारित करने के लिए त्रिस्तरीय मूल्यांकन व्यवस्था है। सबसे पहली रिपोर्ट एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा तैयार की जाती है। इसमें जमीन के बाजार मूल्य, चल रही खरीद बिक्री आदि के हिसाब से नया मूल्य प्रस्तावित किया जाता है। एसडीएम द्वारा की गई अनुंशसा पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी विचार करती है। इनके द्वारा कीमतों का अनुमोदन कर शासन स्तर पर बनी केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को प्रस्ताव भेजा जाता है। इसके बाद आला अधिकारी विचार कर हर जिले के लिए नई गाइडलाइन पर अंतिम अनुमोदन करते हैं जो हर साल 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाता है।
इस तरह लगता है रजिस्ट्री शुल्क
अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचता है तो उसे जमीन के बाजार के अनुसार मुख्य रूप से दो तरह के शुल्क लगते हैं। स्टांप ड्यूटी (मुद्रांक शुक्ल, नगरीय या ग्रामीण कर और उपकर) 6.25 प्रतिशत और कुल कीमत पर 0.80 प्रतिशत पंजीयन शुल्क। सब मिलाकर 7.05 प्रतिशत शुल्क शासन जमीन के हर सौदे में वसूलती है। महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने महिलाओं को रजिस्ट्री में 1 प्रतिशत की छूट दी गई है। किसी महिला के नाम पर रजिस्ट्री हुई तो उन्हें 6.05 प्रतिशत शुल्क रजिस्ट्री कार्यालय में जमा कराना होगा।
कड़े नियम और नोटबंदी की मार
शासन ने अब ब्लैक मनी से बेनामी खरीद-बिक्री बंद कराने के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब सीधे ऑनलाइन पंजीयन होता है। इसकी जानकारी हर साल आयकर विभाग को जाती है। इसके अलावा विक्रेता को कीमत का 50 प्रतिशत चेक से भुगतान करना अनिवार्य है। इससे अघोषित पैसे से नगद खरीदी पर लगाम लग गई। खरीदी-बिक्री में नोटबंदी का भी असर दिख रहा है। इससे जमीन के सौदों में भारी गिरावट आ गई। इससे शासन को भी पंजीयन शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यही कारण है कि अब की बार जमीन की कीमतों में किसी तरह का इजाफा नहीं करके रीयल इस्टेट को कुछ राहत देने की कोशिश हुई है।

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