जांजगीर-चांपा. भागवत की महिमा अनंत है। यह भगवान के श्रीमुख से निश्रित ग्रंथ व पंचम वेद है। भागवत समस्त वेद व उपनिषिदों का सार है। यह मृत्यु को मंगलमय व मोक्षमय बनाने वाला है। ये बातेें पं. रमाशंकर चौबे ने ग्राम तुलसी में शुक्ला परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कही। कथा के पहले दिन आचार्य ने बताया ज्ञान और वैराग्य धर्म के मार्ग हैं और भक्ति उनकी माता है। प्रभु का अवतरण ही धर्म की स्थापना के लिए होता है।
उन्होंने कथा में आगे कहा कि बांस की सात गांठ वासना ही पुर्नजन्म का कारण है। परीक्षित की कथा सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि परीक्षित जैसा श्रोता व सुकदेव जैसा वक्ता हो तो उद्धार हो जाए, भागवत कथा की महिमा अनंत है। यह परम सत्य की अनुभूति व काल के भय से मोक्ष करने वाला ग्रंथ है। पहले दिन की कथा में आचार्य ने विराट भगवान का वर्णन, वराह की उत्पत्ति व हिरणाक्ष वध की कथा का सविस्तार वर्णन किया। इसके पूर्व विधि-विधान से कलश स्थापना के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा में वरण आचार्य पं. विनोद पांडेय हैं तथा मुख्य यजमान के रुप में रत्ना शुक्ला-आशीष शुक्ला बैठे हैं। कथा श्रवण करने चंद्रशेखर शुक्ला, मनोज शुक्ला, रमाकांत मिश्रा, उज्जवल शुक्ला, देवेन्द्र शुक्ला, अभिषेक शुक्ला, अक्षय शुक्ला, सुखीराम कश्यप, जयराम यादव, कौशल कश्यप, राजाराम साहू आदि उपस्थित थे।
कथा सुनने पहुंची कांग्रेस जिलाध्यक्ष
शुक्ला परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष मंजू सिंह कथा श्रवण करने पहुंची। उन्होंने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर आचार्य से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर जिला कांग्रेस के प्रवक्ता रफीक सिद्दिकी, अमित केडिया सहित अन्य लोग उपस्थित थे। इसके अलावा पहले दिन नवागढ़ जनपद के अधिकारी सुरेन्द्र सिंह, बैरागी एवं स्टाफ के लोग भी कथा श्रवण करने पहुंचे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें