जांजगीर-चांपा. यदि आप किसी स्कूल में कर्मचारी हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हो सकता है कि किसी दिन अचानक कोई निर्देश आपको स्कूल के कर्मचारी से सुलभ शौचालय का कर्मचारी बना दे। जी हां, कुछ ऐसा ही फरमान जिले के नगरपंचायत खरौद में संचालित स्कूलों के प्राचार्यों को जारी हुआ है।
दरअसल, नगर पंचायत खरौद में एक अजीबो-गरीब आदेश से स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक सकते में हैं।
दरअसल, नगर पंचायत खरौद में एक अजीबो-गरीब आदेश से स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक सकते में हैं।
नगर पंचायत खरौद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने ऐसा ही एक आदेश निकाला है, जिसमें कहा गया है कि नगर पंचायत खरौद को शासन के आदेशानुसार खुले में शौच मुक्त किया जाना है। शासन के इस आदेश को पूरा करने के लिए नगरवासियों का खुले में शौच जाना प्रतिबंधित है। इसलिए सरकारी स्कूलों में निर्मित शौचालयों को सार्वजनिक करें, ताकि नगर के लोग उसका उपयोग कर सकें। इतना ही नहीं, आदेश में यह भी कहा गया है कि जब लोग स्कूलों के शौचालय का उपयोग करें तो उस दौरान स्कूल के कर्मचारी शौचालय के बाहर ड्यूटी दें। यह आदेश नगर के दस स्कूलों पर लागू होगा। इस आदेश के स्कूलों में पहुंचने के बाद से अजीबो-गरीब स्थिति निर्मित हो गई है। सीएमओ के इस फरमान से जहां स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक नाराज हो गए हैं, वहीं सीएमओ द्वारा 26 जुलाई को जारी इस आदेश को लेकर एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। नपं सीएमओ ने इस आदेश को स्कूलों के प्राचार्यों को जारी करने से पहले जांजगीर के जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भास्कर को इस संबंध में न तो कोई जानकारी दी है और न ही उनसे आदेश निकालने अनुमोदन लिया है।
इस बात की पुष्टि जिला शिक्षा अधिकारी भास्कर ने ‘दैनिक नवीन कदम’ से चर्चा के दौरान की है। डीईओ भास्कर का कहना है कि स्कूलों से संबंधित किसी तरह का आदेश-निर्देश जारी करने से पहले नपं सीएमओ को उनसे एक बार चर्चा जरूर करनी थी। उनका यह भी कहना है कि इस आदेश के संबंध में उन्हें किसी तरह की जानकारी ही नहीं थी। नियमानुसार, आदेश निकालने से पहले नपं सीएमओ को उनसे अनुमोदन लेना था। डीईओ भास्कर का यह भी कहना है कि स्वच्छता अभियान में सबकी भागीदारी सुनिश्चित किया जाना है, लेकिन इस आदेश के संबंध में फिर भी वे नपं सीएमओ से अवश्य चर्चा करेंगे। बहरहाल, देश में चल रहे स्वच्छ भारत अभियान से गांवों की स्थिति बदले या ना बदले, लेकिन सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक व कर्मचारियों की स्थिति जरूर दयनीय होने वाली है।

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