जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ आने का अवसर पहली बार मिला है। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। यहां बहुत प्यारे लोग हैं। किसी भी जगह आप प्रोग्राम देने जाइए, वहां का स्वागत का जो तरीका होता है, उससे प्रोग्राम में और चार चांद लग जाता है। छत्तीसगढ़ी फिल्म में गाने का अवसर मिला तो मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात होगी। छत्तीसगढ़ी बोली बहुत प्यारी है।
ये बातें सारेगामा लिटिल चैंप की कलाकार वैशाली रैकवार ने कही। जिला मुख्यालय जांजगीर में सोमवार को जगराता की प्रस्तुति देने पहुंची वैशाली ने दोपहर में पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस में पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने गायिकी के क्षेत्र में अपनी शुरूआत से लेकर अब तक के हरेक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब मैं तीन साल की थी, तभी से पापा और दादा का भरपूर सहयोग मिला। वे शुरू से ही चाहते थे कि मैं बहुत आगे तक जाऊं। उनकी उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए मैंने एक के बाद एक शो का आडिशन दिया। मेरे फस्ट रियालिटी शो में देश भर से तीन लाख बच्चों ने हिस्सा लिया, जिसमें मैंने टॉप 6 पर अपनी जगह बनाई। सारेगामा लिटिल चैंप के मंच तक पहुंचकर मैंने अपनी पहली मंजिल हासिल की। चूंकि यह तो सिर्फ पड़ाव था और इस क्षेत्र में आगे बढऩा था तो मैंने भरपूर प्रयास किया। सभी का आशीर्वाद मिलता रहा, जिसकी बदौलत मैं आज 30 देशों में शो कर चुकी हूं। मैं परफेक्ट सिंगर बनकर उभरूं, ऐसा प्रयास है। उन्होंने बताया कि कुछ मराठी फिल्मों के लिए प्रोजेक्ट साइन किया है। संभावना है कि जल्द वालीबुड में एंटी मिल जाएगी। अभी मैं बीए सेकेण्ड इयर की स्टूडेंट हूं।
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि देखा जाए तो किसी चीज को लेकर लगन हो तो दबाव महसूस नहीं होता। मेरे अंदर म्युजिक को लेकर पागलपन है, जिसके कारण मैं पढ़ाई के साथ-साथ म्युजिक के लिए टाइम निकाल ही लेती हूं। हां, यह बात जरूर है कि मैं पढ़ाई को भी साथ में लेकर चलती हूं, क्योंकि जीवन में वह भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि मेरे पापा बहुत बड़े फोक सिंगर हैं। मेरे दादा दूरदर्शन के बहुत बड़े कलाकार रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे घर से ही संस्कार मिले हैं। घर से ही मेहनत करने की सीख मिली है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रियालिटी शो में जाने का अनुभव अच्छा रहा, क्योंकि पहले घर से निकलते हैं तो मोहल्ले के सिंगर होते हैं, लेकिन जब रियालटी शो में जाते हैं तो वहां परफामेंस पर विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि मेरे गुरू मेरे पिता एवं दादा हैं। बचपन से ही उन्होंने बहुत कुछ सिखाया और मुझे लेकर मेहनत की। आज जो कुछ भी मेरे पास है वे मेरे पिता एवं दादा की बदौलत है। वैशाली ने बताया कि मेरी चौथीं पीढ़ी है इस क्षेत्र में। घर से ही रूचि पैदा हुई और घर के लोगों ने सपोर्ट किया, जबकि बहुत कम अभिभावक होते हैं जो खासकर, लड़कियों के सिंगिंग और डासिंग पर सपोर्ट करते हैं। इस दौरान उन्होंने तो से नैना... तो से नैना, दमादम मस्त कलंदर गीत गाकर सुनाया। प्रेसवार्ता में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इंजी. रवि पाण्डेय, आयोजन समिति के पदाधिकारी अखिलेश त्रिपाठी, लाला यादव एवं गौरव सिंह मौजूद थे।

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