व्यवस्थापन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति

बिर्रा. स्थानीय बस स्टैंड के समीप गर्जना तालाब के आसपास से फरवरी 2016 में खदेड़े गए लगभग 70 दुकानदार प्रशासन के अडिय़ल रवैये से तंगी की हालत में अपनी हक की लड़ाई लडने मजबूर हैं। दुकानदारों का कहना है कि पिछले सालभर से जो सांप सीढ़ी का खेल चल रहा है, वह बंद हो और उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण हो, ताकि उन्हें तंगहाली से मुक्ति मिल सके।
विदित है कि बम्हनीडीह विकासखंड के सबसे बड़े पंचायत बिर्रा के बस स्टेंड के समीप गर्जना तालाब के पार से तालाब सौन्दर्यीकरण के नाम पर फरवरी 2016 में दुकानदारों को हटाया गया। उनके जमे-जमाये दुकान को तोड़ा गया। वहीं तालाब को सुखाया गया एवं खुदाई भी कराई गई। इसके विरोध में प्रभावित दुकानदारों ने प्रशासन से पुन:वहीं पर दुकान संचालन करने के लिए भागदौड़ किया, लेकिन प्रशासन ने उस जगह पर दुकान संचालन करने की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सभा में पीडि़त दुकानदारों के महिला एवं बच्चों ने जल सत्याग्रह जैसे कदम भी उठाया। आनन-फानन में प्रशासन ने दुकानदारों को बाजार में व्यवस्थापन देने सहमति बनाई और तहसीलदार व पटवारी से मिलकर जगह चिन्हाकिंत किया, जिससे दुकादारों में आशा की किरण दिखाई दी, लेकिन प्रशासन की दोहरी नीति से आज तक व्यवस्थापन के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की जा सकी है। इस संबंध में एक मार्च को पुन: अनुविभागीय अधिकारी चांपा, तहसीलदार बम्हनीडीह, पटवारी व थाना स्टाफ बिर्रा द्वारा दुकानदारों को पंचायत भवन बुलाकर व्यवस्थापन पर चर्चा की गई और बाजार के खाली जगहों पर ही व्यवस्थापन देने लाटरी निकलकर जगह देने की बात की, जिस पर एक स्वर में दुकानदारों ने सहमति नहीं दी और बाजार के जिस जगह को चिन्हान्कित किए हैं, वहीं देने की बात पर अड़े रहे। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि बैठक में स्वयं सरपंच, उपसरपंच व पंच न पहुंचकर उनके प्रतिनीधि शामिल होते हैं, जिससे निर्णय नहीं हो पाता।
अपना रहे दोहरी नीति
तालाब के समीप भाठापारा के पास अवैध कब्जा के नाम पर तोड़े गए एक दुकान को वैध बताकर पुन: दुकान बनाने की अनुमति दे गई है, जहां एक पक्का मकान बनकर तैयार हो गया है। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि पूर्व में जो अवैध था वह अब वैध कैसे हो गया। इस प्रकार की दोहरी नीति से प्रशासन क्या सिद्ध करना चाहता है, यह समझ से परे है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें