सोमवार, 1 मई 2017

श्रमिक दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित, प्राधिकरण की नवपदस्थ सचिव ने किया कविता पाठ

जांजगीर-चांपा. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर एक मई को छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिला कार्यालय परिसर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान प्राधिकरण की नवपदस्थ सचिव ने लोगों को संबोधित करते हुए श्रमिक दिवस पर आधारित एक कविता का पाठ भी किया। 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की नपदस्थ सचिव शुभदा गोयल ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव के निर्देशन पर छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिला कार्यालय परिसर में श्रम संबंधी कानूनी जानकारियों, श्रमिकों के अधिकारों से संबंधित योजनाओं की जानकारी प्रदान करने विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। विधिक साक्षरता शिविर को संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने बताया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बहुधा अपने विधिक अधिकारों को जानकारी नहीं होती। जानकारी एवं जागरूकता के आभाव में वे शोषित होते रहते हैं। जागरूकता शोषण के बचाव का सर्वोत्म माध्यम है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए उनकी कार्यकुशलता की श्रेणियों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है। 

बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें उनके विधिक अधिकार दिलाए जाने, उनके पुनर्वास की व्यवस्था किए जाने के लिए शासन विभिन्न स्तरों पर योजनाएं संचालित कर रहा है तथा श्रम न्यायालयों की भी स्थापना की गई है। प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संघरत्ना भत्पहरी ने बताया कि महात्मा गंाधी ने कहा था कि ’पंूजी और श्रम एक-दूसरे के पूरक हों और एक-दूसरे की सहायता करें। वे एकता और सामंजस्य की भावना के साथ एक बड़े परिवार की तरह रहें’। आज के दिवस को श्रमिक दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरूआत अमेरिका से हुई थी। धीरे-धीरे यह पूरे विश्व में प्रसारित हो गया। 

श्रम शक्ति राष्ट्रशक्ति है। हमारे संविधान के अनुच्छेद 39 में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में पुरूष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार है। पुरूषों और स्त्रियों दोनों का समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार, बालकों को स्वतंत्र और गरिमामय वातावरण में स्वस्थ विकास के अवसर और सुविधाएं प्रदान करने का अधिकार उल्लेखित किया गया है। श्रमिकों से संबंधित कई कानून भी बनाए गए हैं। उनके द्वारा मजदूरी संदाय अधिनियम 1936, समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976, प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम 1991, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम 1986, बंधित श्रम पद्धति अधिनियम, 1976 इत्यादि महत्वपूर्ण कानूनों की संक्षिप्त सारगर्भित जानकारी प्रदान की गई।   

प्राधिकरण की सचिव गोयल ने विधिक साक्षरता शिविर में संबोधित करते हुए बताया कि श्रमिकों के अधिकार दिलाने राज्य और केन्द्र सरकारें समय-समय पर कानून बनाती हैं। कानूनों की समीक्षा कर नए संशोधन भी करती हैं। उनका यह प्रयास रहता है कि श्रमिक वर्ग स्वतंत्र, स्वस्थ व गरिमामय वातावरण में अपना कार्य कर सके। इसलिए हमें इनके बारे में जागरूक होना चाहिए। हमारा आज का कार्यक्रम ’श्रम के प्रवाह में दुर्भाग्य बह जाता है’ के कथानक से प्रेरित है। हम निरंतर श्रम करते रहें। अपने अधिकारों की मंाग करने के साथ-साथ हमें अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करते रहना चाहिए और स्वयं आत्मावलोकन भी करना चाहिए कि हमने अपने अधिकारों की प्राप्ति के प्रयास के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन किया है। 

श्रमिकों के विधिक अधिकार दिलाने विधिक सेवा प्राधिकरण निरंतर अग्रसर है। कोई भी श्रमिक व्यक्ति जिसे उसके विधिक अधिकार से वंचित होना पड़ा है, वह विधिक सेवा प्राधिकरण से नि:शुल्क विधिक सलाह प्राप्त कर सकता है। पात्र व्यक्ति को प्राधिकरण नि:शुल्क विधिक सहायता भी उपलब्ध कराने को तत्पर है। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह, सचिव संतोष कुमार सिंह, ट्रेड यूनियन कौंसिल के अध्यक्ष सुरेश सिंह क्षत्रिय, योगेश बनर्जी सहित तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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