रविवार, 26 मार्च 2017

माधव वकील को बोले-डेढ़ लाख लो और मुंह बंद करो!

पारस पावर एण्ड कोल बेनिफिकेशन प्रबंधन पर आरोप


जांजगीर-चांपा. नगरपंचायत बलौदा के वार्ड क्रमांक एक ठडग़ाबहरा में प्रस्तावित मेसर्स पारस पावर एण्ड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड पर स्थानीय एक अधिवक्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिवक्ता का आरोप है कि कोलवाशरी प्रबंधन ने उन्हें डेढ़ लाख रुपए लेकर मुंह बंद करने के लिए कहा। शनिवार को कोलवाशरी के लिए हुई जनसुनवाई के दौरान विरोध प्रकट करने पर उसे देख लेने की धमकी भी प्रबंधन की ओर से मिली है।

दरअसल, नगर पंचायत बलौदा के वार्ड क्रमांक एक ठडग़ाबहरा में मेसर्स पारस पावर एण्ड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की 0.96 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की कोलवाशरी प्रस्तावित है, जिसके लिए शनिवार को बलौदा के मंडी प्रांगण में पर्यावरणीय जनसुनवाई रखी गई थी। जिला प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर डीके सिंह, पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर की क्षेत्रीय अधिकारी अनिता सावंत तथा जांजगीर एसडीएम अजय उरांव ने निर्धारित समय पर उपस्थित होकर पर्यावरणीय जनसुनवाई शुरू कराई। जनसुनवाई के शुरूआत में मेसर्स पारस पावर एण्ड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने कोलवाशरी के संंबंध में जानकारी दी। इसके बाद क्षेत्रवासियों को अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया गया। 

जनसुनवाई स्थल पर अपना पक्ष रखते हुए बलौदा के अधिवक्ता माधव सराफ ने कहा कि वे शुरू से ही नई कोलवाशरी खोले जाने के विरोध में हैं। इस बात की जानकारी होने पर कोलवाशरी प्रबंधन ने उन पर काफी दबाव बनाया। अधिवक्ता का आरोप है कि कोलवाशरी प्रबंधन ने डेढ़ लाख रुपए लेकर उन्हें मुंह बंद रखने की धमकी दी थी, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। इसके बाद भी कई तरह के हथकड़े अपनाकर उनके विरोध को कुचलने का प्रयास किया गया। अधिवक्ता ने कहा कि कोलवाशरी प्रबंधन ने नगरपंचायत के अध्यक्ष से लेकर एक-एक पार्षद, सीएमओ, क्षेत्र के सभी अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों को मुंह मांगी रकम देकर खरीदा है। इसलिए सभी ने चुप्पी साध रखी है। 

अधिवक्ता सराफ ने यह भी कहा कि एक आम आदमी एनओसी के लिए नपं के दस बार चक्कर काटता है, फिर भी उसे एनओसी नहीं मिलती, जबकि कोलवाशरी प्रबंधन को नियमों को ताक पर रखकर नई कोलवाशरी खोलने के लिए एनओसी दे दी गई है।

बगले झांकते रहे एसडीएम

कोलवाशरी की जनसुनवाई के दौरान अधिवक्ता सराफ ने एक और चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बलौदा तहसील कार्यालय में डायवर्सन के करीब 130 मामले महीनों से लंबित हैं। डायवर्सन कराने के लिए आमजनता तहसील और एसडीएम दफ्तर के चक्कर काट रही है, जबकि प्रस्तावित पारस कोलवाशरी के लिए नियमों को ताक पर रखकर रातों-रात सारी औपचारिकता पूरी कर ली गई। उन्होंने मंच पर बैठे एसडीएम अजय उरांव पर निशाना साधते हुए कहा कि साहब, आखिर नियम-कायदे किनके लिए हैं, वे जो आमजनता हैं या फिर वे जो धन्ना सेठ हैं। अगर नियम-कायदे सबके लिए बराबर हैं तो डायवर्सन के करीब 130 मामले आखिर महीनों से लंबित क्यों हैं? अधिवक्ता सराफ के इस सवाल पर एसडीएम उरांव की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और वे बगले झांकते रहे।

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