रविवार, 26 मार्च 2017

बनरमकेलिया की खेती को बढ़ावा देने बनेगी कार्ययोजना

बहेराडीह के एक युवा किसान ने नई दिल्ली से कराया पेटेण्ट

 

जांजगीर-चांपा. देश में विलुप्त हो रहे चाहे सब्जी वर्गीय बीज हो या फिर धान, औषधीय, दलहनी, तिलहनी या फिर फल-फूल की प्रजाति हो, उनका संधारण, संरक्षण एवं संवर्धन आवश्यक है। 

ऐसे ही विलुप्त हो रही सब्जी वर्गीय पौधे की श्रेणी में आने वाले तथा बरसात के दिनों में आमतौर पर उगने वाला बनरमकेलिया के पौधे तथा बीज का संग्रहण कर जिले के सिवनी (चांपा) से लगे ग्राम बहेराडीह के युवा कृषक दीनदयाल यादव ने पीपीव्ही एफआरए के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र तथा उपसंचालक कृषि जांजगीर के माध्यम से इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की अनुशंसा से कृषि मंत्रालय को प्रस्तुत किया है, जिसे कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने शुक्रवार को कृषि विज्ञान केन्द्र जांजगीर में आयोजित एक दिवसीय पौध किस्म व कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम कृषक प्रशिक्षण जागरूकता कार्यक्रम में किसानों के प्रदर्शित स्टॉल का अवलोकन किया। 

इस दौरान कलेक्टर ने कृषकों से चर्चा करते हुए सराहना की और जिले में इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार करने की बात कही। इसके अलावा कृषक यादव द्वारा संग्रहित पसहर धान, देशी सफेद रूख भांटा, देशी भिण्डी समेत 24 पंजीकृत बीजों की विशेषताएं प्रस्तुत किया। इससे पूर्व लखुर्री के कृषक रामप्रकाश केशरवानी ने विलुप्त हो रही सुगंधित देशी किस्मों की धान के अलावा करीब दो सौ बेर तथा आम के किस्मों का पेटेण्ट रजिस्ट्रेशन भारत सरकार से होने तथा पुरस्कृत होने की जानकारी दी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें