शनिवार, 25 मार्च 2017

लोग बोले-वीडियोग्राफी में कांट-छांट करते हैं अधिकारी, हमें उन पर भरोसा नहीं

नवीन कदम@बलौदा. ठडग़ाबहरा में प्रस्तावित मेसर्स पारस पावर एण्ड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की जनसुनवाई की क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी ने पूरी वीडियोग्राफी करवाई है, लेकिन इस पर भी लोग संतुष्ट नहीं हैं।
क्षेत्रवासियों ने कहा कि इससे पहले भी कई कोलवाशरी के लिए हुई जनसुनवाई की वीडियोग्राफी करवाई गई थी। यहां कुछ और होता है और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को कुछ और वीडियो भेजी जाती है। 

लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पर्यावरण विभाग के अधिकारी जनसुनवाई के लिए कराई गई वीडियोग्राफी में कांट-छांट करते हैं, जिसके कारण जनता की आवाज केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय तक नहीं पहुंच पाती। लोगों ने पर्यावरण अधिकारी से मौके पर ही जनसुनवाई की सीडी तथा प्राप्त आवेदन की प्रति मांगी, लेकिन अधिकारी ने विधिवत् आवेदन लेकर नगरपंचायत के माध्यम से सीडी एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही। इस बात को लेकर भी लोगों में विरोध देखा गया। लोग उग्र रूप धरते हुए कुर्सियां पटकने लगे। वहीं कुछ लोग माइक और स्टैण्ड को तोडक़र जनसुनवाई का बहिष्कार करने लगे। मौके पर हालात ऐसे बने कि सभी लोगों ने एक स्वर में शासन-प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होता देख अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने मोर्चा संभाला और कई थाना क्षेत्रों के निरीक्षक के साथ जनसुनवाई स्थल पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग शांत होने को तैयार नहीं थे। 

लोगों का कहना था कि यह जनसुनवाई है, जहां लोगों को बोलने तथा अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन कोलवाशरी प्रबंधन से बिका हुआ पुलिस प्रशासन दादागीरी पर अमादा है। मौके पर करीब एक घंटे तक जमकर बवाल हुआ। इधर, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी का कहना है कि जनसुनवाई की पूरी वीडियोग्राफी करवाई गई है, जिसे केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा। कोलवाशरी के लिए स्वीकृति देने का अधिकार केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को है। हम तो सिर्फ एक माध्यम हैं। इसलिए इस संबंध में कोई टीका-टिप्पणी नहीं कर सकते। वहीं अपर कलेक्टर डीके सिंह ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान जिन-जिन लोगों ने अपना पक्ष रखा है, उन सभी की बातें लिपिबद्ध की गई है। पूरे समय की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। कोलवाशरी की स्थापना के लिए स्वीकृति देने अथवा न देने का अधिकार केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के हाथों में है।

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