शनिवार, 25 मार्च 2017

सिवनी सरपंच को फिर वापस मिली कुर्सी, कलेक्टर ने पक्ष में पारित किया आदेश

जांजगीर-चांपा. ग्राम पंचायत सिवनी (चांपा) के सरपंच के मामले में फिर एक बार दिलचस्प मोड़ आ गया है। कलेक्टर न्यायालय ने चांपा तहसीलदार के निर्णय को गलत पाते हुए निर्वतमान सरपंच पूजा राठौर के पक्ष में फैसला पारित किया है। नए आदेश के अनुसार, अब सिवनी पंचायत के सरपंच की कुर्सी पूजा राठौर ही संभालेंगी। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सिवनी की सरपंच पूजा राठौर की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना वहां के सभी पंचों ने चांपा एसडीएम को दी थी। पंचों ने इस संबंध में कलेक्टर को भी अवगत करवाया था। सूचना के आधार पर कलेक्टर ने एसडीएम को अविश्वास प्रस्ताव पर सम्मिलन कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देश को गंभीरता से लेते हुए चांपा एसडीएम ने सम्मिलन के लिए 15 जून 2016 की तिथि निर्धारित की। इस दिन नियम समय पर पीठासीन अधिकारी चांपा के तत्कालीन तहसीलदार ग्राम सिवनी पहुंचे। इसी बीच गांव के तीन पंचों के अपह्त होने की खबर सामने आई, जिसकी रिपोर्ट चांपा थाने में दर्ज करवाई गई। इधर, पीठासीन अधिकारी ने सम्मिलन की कार्यवाही पूरी कराई, जिसमें कुल 21 में 14 मत पड़े, जो सरपंच के पक्ष में थे। मगर उतने मतों को तहसीलदार ने सरपंच राठौर के पद पर बने रहने के लिए पर्याप्त नहीं माना। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि जो तीन पंच अपह्त हुए हैं, उनके मत नहीं जुड़े हैं। 

इसके अलावा सम्मिलन के दौरान राजनैतिक दबाव को पर्याप्त कारण बताकर पीठासीन अधिकारी ने सरपंच राठौर को पदच्युत कर दिया। इस कार्यवाही को लेकर निर्वतमान सरपंच राठौर ने सीधे कलेक्टर न्यायालय में अपील की। अपील पर सुनवाई करते हुए कलेक्टर ने चुनाव से संबंधित सारे दस्तावेज देखे तथा कहा कि छत्तीसगढ़ पंचायतीराज अधिनियम की धारा 21(1) के प्रावधान अनुसार उपस्थित तथा मतदान करने वाले पंचों के तीन चौथाई बहुमत होने पर सरपंच को पदच्युत नहीं किया जा सकता। नियम के अनुसार, 21 में से 14 दो तिहाई है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। फिर भी पीठासीन अधिकारी द्वारा की गई कार्यवाही दूषित है और उनके द्वारा अविश्वास प्रस्ताव होने की घोषणा किया जाना असंवैधानिक है। इसलिए 15 जून को पीठासीन अधिकारी द्वारा सरंपच को पदच्युत किए जाने की घोषणा को निरस्त किया जाता है। इस मामले की पैरवी चांपा के युवा अधिवक्ता जितेन्द्र जायसवाल ने की।

सरपंच का ससुर पहुंचा था जेल

सम्मिलन के दौरान उपसरपंच बैसाखूराम बरेठ सहित तीन पंचायत प्रतिनिधियों के अचानक गायब होने की खबर से गांव सहित समूचे क्षेत्र में बवाल मच गया था। सम्मिलन स्थल ग्राम पंचायत में मौजूद लोगों ने उपसरपंच सहित तीनों को गायब करने में सरपंच राठौर के ससुर का हाथ होना बताया। इसके बाद आक्रोशित लोगों ने चक्काजाम कर चांपा थाने का घेराव भी किया था। मामला तूल पकड़ता देख चांपा सहित आसपास के थानों की पुलिस गांव पहुंची थी और आनन-फानन में सरपंच के ससुर सहित अन्य लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर उन्हें हवालात भेजा था। बाद में उन्हें जमानत करवाना पड़ा था।

तीन साल से ठप है विकास कार्य

सरपंच पद को लेकर उपजे विवाद से ग्राम पंचायत सिवनी का विकास कार्य पिछले तीन वर्ष से लगभग ठप है। विधायक आदर्श गांव होने के बावजूद यहां सुविधा-संसाधन बढ़ नहीं पा रहे हैं। बताया जाता है कि इसका मुख्य कारण पंचायत प्रतिनिधियों में आपसी तालमेल नहीं होना है। ऐसे में पूर्व सरपंच पूजा राठौर के दोबारा कुर्सी संभालने से विरोधी खेमा फिर शांत होने वाला नहीं है। यह भी बात सामने आ रही है कि कलेक्टर के इस आदेश के बाद विरोधी खेमा एक बार फिर सक्रिय हो गया है और गुणा-गणित करने में जुट गया है।

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