जांजगीर-चांपा. पूरे विश्व में बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह यदि है तो वह उसकी मां का गर्भ होता है, जहां वह अपने को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। और यदि वह मां के गर्भ में ही सुरक्षित नहीं है तो फिर कहां होगा। पुत्र प्राप्ति की इच्छा में कन्या भू्रण हत्या के मामले चिंताजनक हैं। यह मान्यता है कि उपर वाले भगवान के बाद धरती पर यदि किसी को भगवान की संज्ञा दी जाती है तो वह चिकित्सक होते हैं, जिनका पेशा सम्मान व आस्था की नजर से देखा जाता है। इसलिए चिकित्सकों का यह दायित्व है कि वे ऐसा प्रयास करें उनके संस्थानों में आने वाले लोगों को बताएं और उन्हें जागरूक करें कि लिंग चयन करना, करवाना, भ्रूण हत्या जैसे कृत्य गंभीर अपराध हैं। सामाजिक परिवेश में भी ये निंदनीय हैं। इन्हीं सब उद्देश्यों को ध्यान में रखकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा यह कार्यशाला आयोजित की गई है।
ये बातें जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव ने सोमवार को जिला न्यायालय सभागार में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 पर आयोजित कार्यशाला में कही। सर्वप्रथम जिला न्यायाधीश श्रीवास्तव, कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अजय केशरवानी, मुख्य चिकित्सा सह स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. व्ही जयप्रकाश द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके बाद कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश एके धुुव ने कलेक्टर, उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बीपी पाण्डे ने जिला न्यायाधीश, अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संतोष कुमार आदित्य ने अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अजय केशरवानी, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अश्वनी चतुर्वेदी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. व्ही जयप्रकाश को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने जिले में इस तरह के अनुकरणीय जागरूकता कार्यशाला के आयोजन के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि पुरूष और स्त्री का बढ़ता लैंगिक अनुपात चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या तो अपराध है ही और उसके संबंध में कानून के अनुसार कार्यवाही की जाएगी, लेकिन हमारा यह नैतिक दायित्व भी होता है कि हम बच्चियों के जन्म के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित एवं उज्जवल भविष्य भी प्रदान करें। जिले में पीएनडीटी एक्ट के दिशा निर्देशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कराना उनकी प्राथमिकता रहेगी और वह इस संबंध में बनी सलाहकार कमेटी के पदाधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। कार्यशाला के निर्धारित कार्यक्रम की श्रृंखला में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उदय लक्ष्मी परमार द्वारा गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 पर तैयार पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें उन्होनें कानूनी पहलुओं एवं उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों द्वारा पारित निर्णयों के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंनं बताया कि किस प्रकार लिंग चयन संबंधी अपराधों में न्यायालय में मामला प्रस्तुत किए जाने के दौरान प्रक्रियात्मक त्रुटियां की जाती हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. व्ही जयप्रकाश ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से द प्री-कान्सेप्शन एवं प्री-नेटल डायग्नोस्टिक्स (प्राहिबिशन आफ सेक्स सिलेक्शन) नियम 1996, सोनोग्राफी सेंटर के संचालन संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश, व्यावसायिक सदाचार एवं सामाजिक कर्तव्यों पर जानकारी प्रदान की। ग्राफिक प्रेजेंटेशन के माध्यम से ग्राम स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक लिंगानुपात के अंाकड़ों का प्रदर्शन किया और विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यशाला में जिला न्यायाधीश ने अपना उद्बोधन देते हुए बताया कि संभवत: जिले में प्रथम ऐसी कार्यशाला आयोजित की गई है, जो मुख्यत: लिंग चयन, कन्या भू्रण हत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आधारित है। पूरे जिले में 17 सोनोग्राफी सेंटर संचालित हैं और जिला प्रशासन द्वारा पीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में सलाहकार समिति भी गठित की गई है। इस कार्यशाला में जिले के समस्त सोनोग्राफी सेंटर के संचालक, स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों, सलाहकार समिति के पदाधिकारियों, समाजसेवी संगठनों को इसी उद्देश्य से आमंत्रित किया गया कि हम इस संबंध में कानूनी प्रावधानों को जाने एवं स्वयं अपने नैतिक, सामाजिक और पदीय दायित्व को समझें तथा दूसरों को भी जागरूक करें, ताकि पुत्र की चाहत में कन्या भू्रण हत्या जैसे अनैतिक कृत्य पूरी तरह समाप्त हो जाएं। कार्यशाला में जिले में पदस्थ समस्त न्यायाधीश, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, लोक अभियोजक, जिला अभियोजन अधिकारी, जनसम्पर्क कार्यालय के अधिकारी, जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. पीसी जैन, नोडल अधिकारी डॉ. एमडी तेंदुए, डॉ. एके जगत, भारतीय चिकित्सा संघ के सदस्य डॉ. यूसी शर्मा, डॉ. सौरभ बिरथरे, डॉ. अतुल राठौर, डॉ. निहारिका राठौर, डॉ. आरके सिंह, डॉ. ए पालीवाल, डॉ. एन चन्द्रवंशी एवं अन्य, सोनोग्राफी सेंटर के संचालक, जिले के खण्ड चिकित्सा अधिकारी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ संस्था के जिला संयोजक ब्यास कश्यप एवं सहसंयोजक अनुराधा शुक्ला सहित पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।
डॉ. यूसी शर्मा, डॉ. पीसी जैन, डॉ. डीएन अग्रवाल द्वारा कार्यशाला में खुली चर्चा के दौरान अपने विचार व्यक्त किए गए और सुझाव प्रदान किए गए। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ संस्था की सहसंयोजक अनुराधा शुक्ला ने कार्यशाला का आभार व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से उनकी योजनाओं को भी एक नई दिशा मिली है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शुभदा गोयल ने कार्यशाला का संचालन करते हुए अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार प्रदर्शन किया और पीएनडीटी एक्ट की जानकारी संबंधित पाम्प्लेट वितरित करवाए।
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